झारखंड केंद्रीय विवि में नियुक्ति परीक्षा में गंभीर अनियमितताएँ: आजसू

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रांची: आजसू छात्र संघ ने झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय रांची द्वारा आयोजित नन टीचिंग नियुक्ति परीक्षा में हुई गंभीर अनियमितताओं, मिलीभगत और प्रक्रियागत उल्लंघनों के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ ने परीक्षा को तत्काल निरस्त करने और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की माँग की है। आजसू छात्र संघ ने कहा कि 31 अक्टूबर 2025 को आयोजित इस परीक्षा में पारदर्शिता, निष्पक्षता और वैधानिक प्रक्रियाओं की खुलेआम अवहेलना की गई है। यह न केवल परीक्षा की गरिमा को आघात पहुँचाता है, बल्कि विश्वविद्यालय की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। संघ ने इस संबंध में कुलाधिपति शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्यपाल को औपचारिक पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच समिति गठित करने और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है। संघ ने बताया कि पूर्व में इसी विज्ञापन के अंतर्गत परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा कराई गई थी, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए जानी जाती है। किंतु विश्वविद्यालय प्रशासन ने एनटीए द्वारा परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उसे निरस्त कर दिया, क्योंकि कथित रूप से भ्रष्ट अधिकारियों के पूर्व निर्धारित उम्मीदवार उस परीक्षा में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद परीक्षा की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को दे दी गई, जो विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और डिप्टी रजिस्ट्रार से संबंधित बताई जा रही है। यह निर्णय बिना किसी औचित्य या अधिसूचना के लिया गया, जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि पूरा मामला पक्षपात और मिलीभगत का परिणाम है। संघ ने कहा कि परीक्षा के संचालन में गोपनीयता का भी खुला उल्लंघन किया गया। लगभग 1600 अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए गए, परंतु परीक्षा में 500 से भी कम उम्मीदवार उपस्थित हुए, जो इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हैं। परीक्षा समाप्त होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने भ्रष्ट अधिकारियों के पसंदीदा और पूर्व-निर्धारित फर्जी उम्मीदवारों की नियुक्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जल्दबाजी में परिणाम घोषित कर दिया। जबकि अधिकांश वास्तविक अभ्यर्थियों के परिणामों को रोक दिया गया या अपूर्ण बताते हुए वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं किया गया। पूरी प्रक्रिया यह स्पष्ट करती है कि रिजल्ट भी पूर्व नियोजित षड्यंत्र और पक्षपातपूर्ण तरीके से तैयार किया गया, ताकि कुछ विशेष उम्मीदवारों को अनुचित लाभ दिया जा सके और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को भ्रष्टाचार के तहत संचालित किया जा सके। संघ ने कहा कि झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसी राष्ट्रीय संस्था से पारदर्शिता और नैतिक आचरण की सर्वोच्च अपेक्षा की जाती है। लेकिन इस परीक्षा प्रक्रिया ने इन आदर्शों को ठेस पहुँचाई है और अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर किया है। यह सिर्फ़ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं, आदिवासी समाज और मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य की लड़ाई है।

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