जलवायु परिवर्तन के आलोक में नई फसल योजना बनाने की जरूरत: डॉ एके सिंह

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sunil verma
रांची: प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर के पूर्व कुलपति डॉ एके सिंह ने जलवायु परिवर्तन के आलोक में वर्तमान फसल योजना में बदलाव पर जोर दिया है। कौन फसल कब लगायी जाय, इसपर पुनर्विचार करने से बेमौसम और अप्रत्याशित बारिश, गर्मी, ठंड, सुखाड़, बाढ़ आदि की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर उपज ली जा सकेगी। डॉ सिंह बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के रबी अनुसंधान परिषद की 43वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा की उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवार नाशक आदि के छिड़काव जैसे कई कृषि कार्य ड्रोन के माध्यम से किया जा रहे हैं। यह प्रवृत्ति सतत बढ़ेगी, इसलिए ड्रोन फ्रेंडली कृषि इनपुट विकसित और प्रयोग करने की दिशा में भी भावी अनुसंधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत से किसान शून्य कर्षण और सीधी बोआई वाले धान की खेती छोड़ रहे हैं, इसलिए किसानों के व्यवहार में बदलाव के कारणों पर भी शोध की जरूरत है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ ए वदूद ने कहा कि नये प्रभेदों के विकास में अबतक हमारा मुख्य लक्ष्य अधिक उपज रहा है किंतु अब वैसी फसल किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा जो विभिन्न प्रकार के जैविक दबाव सहन कर सकें और विपरीत मौसम परिस्थितियों में भी बेहतर उपज दे सकें। बीएयू द्वारा विकसित प्रभेद और प्रौद्योगिकी किसानों के बीच लोकप्रिय हों और उनके कृषि व्यवहार का अंग बनें, इसके लिए भी हर संभव प्रयास होना चाहिए। बीएयू के आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ जेड ए हैदर ने कहा कि हमारे वैज्ञानिक शोधार्थी नहीं है इसलिए उन्हें हमेशा कुछ नया, कुछ आउट आॅफ द बॉक्स करने का प्रयास करना चाहिए। गर्मी के मौसम में अच्छी फसल दे सकने की क्षमता वाली वाली गेहूं की किस्में विकसित करने तथा एक फसल के लाभकारी और वांछित जीन को दूसरी फसलों में ट्रांसफर करने का इनोवेटिव प्रयास होना चाहिए। प्रायोगिक फसलों का डाटा लेने का काम एफओ और पीएचडी के विद्यार्थियों से लेना चाहिए। कुलपति का प्रभार सम्भाल रहे रजिस्ट्रार डॉ नरेंद्र कुदादा ने अपने अध्यक्ष भाषण में कहा कि वैज्ञानिकों की घोर कमी के बावजूद विश्वविद्यालय किसानों के हित में महत्वपूर्ण शोध कार्य कर रहा है। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ जगरनाथ उरांव ने किसानों की स्थिति में अपेक्षित बदलाव लाने के लिए शोध और प्रसार तंत्र द्वारा समेकित प्रयास किए जाने पर बोल दिया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन झारखंड के निदेशक मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय और शोध संस्थान- सबका उद्देश्य उत्पादकता वृद्धि और लाभकारी विपणन द्वारा किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसलिए कोई भी प्रयास किसानों को ही केंद्र बिंदु में रखकर किया जाना चाहिए।
बीएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ पीके सिंह ने स्वागत भाषण करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा विकसित प्रभेदों, तकनीक, पैकेज आफ प्रैक्टिसेज, बीज उत्पादन आदि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पौधा प्रजनन विभाग द्वारा रिलीज प्रस्ताव तैयार करने के लिए 10 नई वेराइटी लाइंस की एडवांस्ड स्क्रीनिंग की जा रही है। कार्यक्रम का संचालन शशि सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ चन्द्रशेखर महतो ने किया। इस अवसर पर हाल में रिटायर हुए या होने वाले तीन वैज्ञानिकों- प्रसार शिक्षा विभाग की डॉ निभा बाड़ा, बायोटेक्नोलॉजी कॉलेज की डॉ मधुपर्णा बनर्जी तथा पौधा प्रजनन विभाग के डॉ कृष्णा प्रसाद को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। नवोन्मेषी कृषि के लिए तीन प्रगतिशील किसानों- पिस्का नगड़ी के शुकरा उरांव, चान्हो के विकास प्रसाद तथा पूर्वी सिंहभूम के उमेश चंद्र मुंडा को भी सम्मानित किया गया।

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