जमीन की हेराफेरी और दलाली में आदिवासी समाज के ही नेताओं का हाथ : दुर्गा उरांव

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Eksandeshlive Desk

रांची : झारखंड अगेंस्ट करप्शन के केंद्रीय अध्यक्ष दुर्गा उरांव ने राज्य में जमीन की लूट और बिचौलियों की बढ़ती सक्रियता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने राज्य सरकार से अवैध रूप से जमीन की बढ़ती खरीद-बिक्री और कब्जा करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। दुर्गा उरांव ने शनिवार को कहा कि इतिहास गवाह है कि झारखंड में खूंटकटी, भुईहरी, पहनाई सहित अन्य पारंपरिक जमीनों पर सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासियों के साथ हुआ है। दुर्गा उरांव ने राज्य सरकार से अवैध रूप से जमीन की बढ़ती खरीद-बिक्री और कब्जा करनेवालों की सख्त जांच कराने और चिन्हित आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आदिवासी समाज अपनी जमीन की रक्षा करने के लिए एकजुटता के साथ आगे आएं : दुर्गा उरांव ने कहा कि छोटानागपुर कास्तकारी अधिनियम (सीएनटी अधिनियम) (1908) और संथाल परगना कास्तकारी अधिनियम (एसपीटी अधिनियम) (1949) होने के बावजूद इनकी जमीन हथियाने का कार्य निरंतर जारी है। ऐसी जमीन की हेराफेरी और दलाली करने में आदिवासी समाज के कुछ नेताओं का ही हाथ है। जमीन को कब्जा दिलाने और बेचने जैसे कार्यों में वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं। दुर्गा उरांव ने कहा कि आज मुंडा और अन्य आदिवासी समुदायों की जमीन बड़े पैमाने पर कब्जा की जा रही है। इस प्रक्रिया में समाज के भीतर से ही कुछ लोग उभरकर सामने आते हैं। यदि इस पर रोक नहीं लगी तो आनेवाली पीढ़ियां अपनी ही जमीन से बेदखल होकर विस्थापन की मार झेलेंगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को भी चाहिए कि वे अपनी जमीन की रक्षा करने के लिए एकजुटता के साथ आगे आएं।

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