जमीन सीमांकन के लिए तीन साल से भटक रहे हैं दलित परिवार

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  • अंचल पर रिश्वत मांगने का लगाया आरोप

अजय राज
प्रतापपुर (चतरा): प्रखंड क्षेत्र में जमीन संबंधित विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं वैसे तो कहने को हर सप्ताह जमीन संबंधित विवाद को सुलझाने हेतु थाना दिवस का आयोजन किया जाता है परंतु इसके भी कोई ठोस परिणाम देखने सुनने को नहीं के बराबर ही दिखाई दे रहा है। ऐसे में न केवल थाना दिवस की प्रासंगिकता बल्कि प्रतापपुर अंचल की कार्यप्रणाली पर भी ग़भीर सवाल उठने लाज़मी हैं।
ताजा मामला टंडवा पंचायत का है जहां एक दलित परिवार न्याय के लिए पिछले तीन साल से अंचल व जिला मुख्यालय का चक्कर लगा- लगा कर थक -हार गया है। उक्त जमीन का सीमांकन तथा कब्जे को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है, जहां दलित परिवार के लोगों ने प्रतापपुर अंचल कर्मियों पर जमीन का सीमांकन एवं कब्जा कराने के एवज में एक लाख रुपए की रिश्वत मांगे जाने का गंभीर आरोप लगाया है। संबंधित जमीन का मामला पिछले तीन वर्षों से लंबित है, जिससे पीड़ित परिवार लगातार अंचल कार्यालय का चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, टंडवा पंचायत के दुमुहान गांव निवासी रामकिशुन भारती, अरविंद भारती एवं कुल्ला भारती को खाता संख्या 16, प्लॉट 683/22 पर कुल एक एकड़ भूमि बंदोबस्ती संख्या 132/1988-89 के तहत आवंटित की गई थी। पीड़ितों का दावा है कि उनके पास जमीन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज—परचा, ऑफलाइन व ऑनलाइन रसीद—उपलब्ध हैं, साथ हीं जमीन का खाता ,प्लॉट एवं रकबा पंजी –2 में दर्ज है।सारे दस्तावेज अंचल कार्यालय में जमा भी किया जा चुका है। बताया जाता है कि उक्त जमीन के सीमांकन के लिए तीन वर्ष पूर्व अंचल कार्यालय में आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ितों का आरोप है कि जानबूझकर सीमांकन प्रक्रिया को लंबित रखा जा रहा है और इसके लिए उनसे मोटी रकम की मांग की जा रही है। वहीं दूसरे पक्ष के जागो भारती समेत सात लोगों का कहना है कि विवादित भूमि उनके रैयती जमीन के समीप है, इसलिए उस पर उनका अधिकार बनता है। इसी विवाद को लेकर 3 मई 2024 को दोनों पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हुई थी, जिसमें पत्थरबाजी और मौके पर मौजूद सीईओ के सरकारी वाहन को क्षति पहुंचाई गई थी। इस मामले में प्रतापपुर थाना कांड संख्या 55/2024 दर्ज करते हुए कई लोगों को जेल भी भेजा गया था, हालांकि अब अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं। पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत चतरा उपायुक्त से भी की है। बताते चलें कि पीड़ित दलित परिवार ने जमीन का सीमांकन तथा कब्जा कराने को लेकर अपर समाहर्ता को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी। जिसको लेकर अपर समाहर्ता कोर्ट में प्रथम पक्ष एवं द्वितीय पक्ष को बजाब्ते नोटिस भेज कर अपने- अपने कागजात प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। परंतु दो–दो नोटिस मिलने के बावजूद दूसरे पक्ष के द्वारा उक्त एक एकड़ जमीन का कोई कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया।वहीं अपर समाहर्ता कोर्ट के द्वारा जब अंतिम नोटिस भेजा गया तो आनन फानन में दूसरे पक्ष के लोगों ने उपस्थिति होकर कुछ कागजात प्रस्तुत किए। जिसके आलोक में अपर समाहर्ता द्वारा पत्रांक– 2905, दिनांक– 23/12/2025 के तहत अंचल अधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि दूसरे पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज संदेहास्पद प्रतीत होता है। अतः उक्त दस्तावेज की जांच कर कब्जे के आरोपों की जांच कर उचित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
परंतु ताज्जुब की बात यह है कि अपर समाहर्ता कोर्ट से आदेश की कॉपी प्राप्त होने के लगभग चार माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है तथा उक्त जमीनी विवाद को उलझा कर रखा जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या अंचल कार्यालय एक बार फिर मार पीट या कोई खूनी संघर्ष का इंतजार कर रही है। ऐसे में निश्चित तौर पर प्रतापपुर अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इस बारे में जब अंचल अधिकारी विकास कुमार टुडू से बात की गई तो उन्होंने लगभग तख्त लहजे में ऑफिस में आकर बात करने की बात कही, वहीं जब पूछा गया कि क्या आप अंचल कार्यालय में मौजूद हैं तो उन्होंने कहा कि नहीं। वहीं इस पूरे मामले को लेकर अपर समाहर्ता अरबिंद कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रतापपुर सीओ को इस इस संबंध में आवश्यक करवाई हेतु पत्र निर्गत किया जा चुका है जिसमें जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन विवाद जैसे अति संवेदनशील मामले में भी पदाधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा रहेगा तो आखिर आम आदमी न्याय के लिए किसका दरवाजा खटखटाएगा, यह समझ से परे है।

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