केंद्रीय बजट : भारत को वैश्विक पर्यटन गंतव्य और चिकित्सा पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित करने पर जोर

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : सरकार ने संसद में रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में देश को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य और चिकित्सा पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने समेत कई घोषणाएं की हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजट भाषण में पर्यटन में रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा आय की अपार क्षमता पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य भारत की विरासत को आधुनिक तकनीक और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ना है। भारत की चिकित्सा सेवाओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए वित्त मंत्री ने निजी क्षेत्र के सहयोग से राज्यों में पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की योजना पेश की है। ये केंद्र केवल अस्पताल नहीं, बल्कि चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के एकीकृत परिसर होंगे। इनमें आयुष केंद्र, डायग्नोस्टिक्स, पश्चात देखभाल और पुनर्वास की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। यह पहल डॉक्टरों और सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

इसके अलावा, पर्यटन को अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे और कौशल विकास पर जोर दिया है। मौजूदा ‘राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी परिषद’ को अपग्रेड कर एक राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान बनाया जाएगा। यह उद्योग और सरकार के बीच सेतु का कार्य करेगा। इसमें 20 प्रतिष्ठित स्थलों पर 10 हजार गाइडों को प्रशिक्षित करने के लिए एक पायलट योजना शुरू होगी। आईआईएम के सहयोग से यह 12 सप्ताह का हाइब्रिड कोर्स होगा। सभी सांस्कृतिक और विरासत स्थलों के दस्तावेजीकरण के लिए ‘राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड’ की स्थापना की जाएगी। भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए 15 महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों को ‘जीवंत सांस्कृतिक स्थलों’ के रूप में विकसित किया जाएगा। लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे स्थलों पर संरक्षण प्रयोगशालाएं और व्याख्या केंद्र बनेंगे। खुदाई वाले क्षेत्रों में जनता के लिए विशेष पैदल मार्ग बनाए जाएंगे। हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय मार्ग, पूर्वी और पश्चिमी घाटों में ट्रेकिंग मार्ग और ओडिशा, कर्नाटक एवं केरल के तटों पर ‘कछुआ मार्ग’ विकसित किए जाएंगे। सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत के विकास के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए हैं। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध स्थलों का संरक्षण और वहां तीर्थयात्री सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ ‘एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे’ का विकास होगा। पूर्वोदय राज्यों में 5 नए पर्यटन स्थल विकसित होंगे और 4 हजार ई-बसें प्रदान की जाएंगी।

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