केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी आवंटन बढ़ा

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रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ का आवंटन, पिछले वित्त वर्ष में 6.81 लाख करोड़ था

Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में पिछले साल पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के बाद भारत सरकार ने अपने केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 15 फीसदी आवंटन बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने रविवार को केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए, जो पिछले वित्त वर्ष में दिए गए 6.81 लाख करोड़ रुपये से 15 फीसदी ज्यादा है। इससे सेनाओं के आधुनिकीकरण पर सरकार के लगातार ध्यान देने का संकेत मिलता है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कोई खास नीति की घोषणा नहीं की, लेकिन केंद्र ने रविवार को रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए कुल रक्षा बजट पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी है। पिछले बजट में केंद्र ने डिफेंस के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये रखे थे, जिससे यह कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। पिछले बजट में डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) में सैलरी, अलाउंस, मेंटेनेंस और ऑपरेशनल तैयारी का हिस्सा 3.12 लाख करोड़ रुपये था।

इस वर्ष रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी होने से उपकरण, आधुनिकीकरण और घरेलू विनिर्माण पर ज्यादा खर्च होने की उम्मीद है। सरकार ने यह भी कहा है कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की कोशिशों के मुताबिक रक्षा बजट का बढ़ा हिस्सा घरेलू उद्योग की तरफ जाता रहेगा। रक्षा क्षेत्र के लिए इसलिए बजट आवंटन बढ़ाया गया है, क्योंकि भारत रक्षा विनिर्माण में ज्यादा आत्मनिर्भरता के लिए अपनी कोशिश जारी रखे हुए है। पिछले दस सालों में भारत का डिफेंस बजट ऊपर की ओर बढ़ा है। हालांकि, जीडीपी में डिफेंस खर्च का हिस्सा पिछले कुछ सालों में कम हुआ है। सरकारी डेटा के मुताबिक, कुल डिफेंस खर्च 2015-16 में 2.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। बजट भाषण में वित्त मंत्री की चुप्पी के बावजूद रक्षा क्षेत्र को ज्यादा आवंटन दिखाता है कि केंद्र सरकार पाकिस्तान और चीन से दोहरे खतरों के बीच सैन्य तैयारी और आधुनिकीकरण पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है। आधुनिकीकरण में तेजी लाने और स्वदेशी निर्माण को बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए पूंजीगत व्यय पर मुख्य फोकस रहा है। भारत का स्वदेशीकरण अभियान इस सेक्टर को आकार दे रहा है। वित्त वर्ष 2025 में घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024 के मुकाबले 12.04 फीसदी ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ और निर्यात 50 हजार करोड़ तक पहुंचाना है। आवंटित बजट में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस समय नौसेना के लिए राफेल फाइटर जेट, सबमरीन और अनमैन्ड एरियल व्हीकल के सौदे किये जाने की तैयारी है। डिफेंस बजट (सिविल) में पिछले साल के 28,554.61 करोड़ रुपये के मुकाबले 0.45 परसेंट की कमी की गई है। इस बीच, डिफेंस सर्विसेज (रेवेन्यू) और कैपिटल आउटले को क्रमशः 3,65,478.98 करोड़ रुपये और 2,19,306.47 करोड़ रुपये दिए गए, जो 17.24 फीसदी और 21.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। पेंशन के लिए आवंटन में भी बढ़ोतरी हुई है, जिसमें केंद्र ने 1,71,338.22 करोड़ रुपये दिए।

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