केंद्रीय कैबिनेट ने 9,072 करोड़ की तीन रेल मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को रेल मंत्रालय की तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 9,072 करोड़ रुपये है और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सीसीईए की हुई बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गयी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं में गोंदिया–जबलपुर दोहरीकरण, पुनारख–किऊल तीसरी एवं चौथी लाइन तथा गम्हरिया–चांडिल तीसरी एवं चौथी लाइन शामिल हैं। ये तीनों परियोजनाएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों को कवर करेंगी और इनके माध्यम से भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,407 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिनकी कुल आबादी करीब 98 लाख है। लाइन क्षमता में वृद्धि से परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम होगी। परियोजनाएं प्रधानमंत्री की ‘न्यू इंडिया’ की परिकल्पना के अनुरूप क्षेत्रीय विकास को गति देंगी और रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि कर स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होंगी। ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत योजना और बहु-मोडल संपर्क को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही सुगम होगी। क्षमता विस्तार से जबलपुर स्थित कचनार शिव मंदिर, बालाघाट का कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार झरना, चांडिल बांध तथा दलमा वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क और बेहतर होगा। ये मार्ग कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, फ्लाई ऐश, उर्वरक, खाद्यान्न और पेट्रोलियम पदार्थ (पीओएल) जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्षमता वृद्धि से लगभग 52 मिलियन टन प्रतिवर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। रेलवे के पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन साधन होने के कारण इन परियोजनाओं से देश की लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी, तेल आयात में लगभग 6 करोड़ लीटर की बचत होगी तथा लगभग 30 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

2026-27 सीजन के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी : मंत्रिमंडल ने इसके साथ ही विपणन सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नए ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सीसीईए ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट (टीडी-3 ग्रेड) का एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि विपणन सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट का एमएसपी पिछले विपणन सीजन 2025-26 के मुकाबले 275 रुपये प्रति क्विंटल ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कच्चे जूट का एमएसपी विपणन सीजन 2014-15 के 2400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर विपणन सीजन 2026-27 में 5,925 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो 3,525 रुपये प्रति क्विंटल यानी (2.5 गुना) की बढ़ोतरी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपणन सीजन 2014-15 से विपणन सीजन 2025-26 के दौरान जूट उगाने वाले किसानों को दी गई एमएसपी रकम 1342 करोड़ रुपये थी, जबकि विपणन सीजन 2004-05 से विपणन सीजन 2013-14 के दौरान दी गई रकम 441 करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से पूरे भारत में उत्पादन की औसत लागत पर 61.8 फीसदी का रिटर्न मिलेगा। विपणन सीजन 2026-27 के लिए कच्चे जूट का घोषित एमएसपी बजट 2018-19 में सरकार द्वारा घोषित पूरे भारत में उत्पादन की औसत लागत का कम से कम 1.5 गुना एमएसपी तय करने के सिद्धांत के अनुसार है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जूट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (जेसीआई) प्राइस सपोर्ट ऑपरेशन करने के लिए केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी बनी रहेगी और ऐसे ऑपरेशन में अगर कोई नुकसान होता है तो केंद्र सरकार उसकी पूरी भरपाई करेगी।

शाहपुर तक अहमदाबाद मेट्रो विस्तार को दी मंजूरी, 1,067 करोड़ रुपये की परियोजना : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (जीएमआरसी) के मौजूदा उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर को गिफ्ट सिटी से शाहपुर तक 3.33 किलोमीटर विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1,067.35 करोड़ रुपये है और इसे लगभग चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह पूरा खंड एलिवेटेड (ऊपर से गुजरने वाला) होगा तथा इसमें तीन नए एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। यह विस्तार अहमदाबाद शहर और गिफ्ट सिटी क्षेत्र के बीच सार्वजनिक परिवहन संपर्क को और मजबूत करेगा। प्रस्तावित रूट के आसपास स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आवासीय क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन से वर्ष 2029 तक प्रतिदिन लगभग 23,702 यात्रियों के इस कॉरिडोर के उपयोग का अनुमान है, जो वर्ष 2041 तक बढ़कर लगभग 58,059 प्रतिदिन हो सकता है। इससे अहमदाबाद और गिफ्ट क्षेत्र के बीच व्यवसाय, रोजगार तथा शिक्षा से जुड़े आवागमन की आवश्यकता को सुगम और तेज बनाया जा सकेगा। विस्तार से नेटवर्क एकीकरण बेहतर होगा और उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर की समग्र उपयोगिता बढ़ेगी। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी, यातायात दबाव घटेगा और पर्यावरणीय लाभ भी प्राप्त होंगे।परियोजना के निर्माण चरण में लगभग 1,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जबकि संचालन एवं अनुरक्षण (ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस) चरण में लगभग 250 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा। इसके अतिरिक्त, निर्माण, आपूर्ति, सेवाओं तथा सहायक गतिविधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या में उत्पन्न होंगे। यह परियोजना गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीएमआरसी) द्वारा क्रियान्वित की जाएगी, जो भारत सरकार और गुजरात सरकार के बीच 50:50 का संयुक्त उपक्रम है। वर्तमान में अहमदाबाद मेट्रो के अंतर्गत चरण-1 और चरण-2 सहित कुल 68.28 किलोमीटर लंबा नेटवर्क परिचालन में है, जिसमें 53 स्टेशन शामिल हैं। चरण-1 (एपीएमसी से मोटेरा स्टेडियम तथा थलतेज गाम से वस्त्राल गाम) सितंबर 2022 से और चरण-2 (मोटेरा स्टेडियम से महात्मा मंदिर तथा जीएनएलयू से गिफ्ट सिटी) जनवरी 2026 से संचालित है। इस मेट्रो नेटवर्क की वर्तमान औसत दैनिक सवारी लगभग 1.60 लाख यात्रियों की है। गिफ्ट सिटी से शाहपुर तक यह विस्तार अहमदाबाद महानगर क्षेत्र में सतत, सुरक्षित और आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली को और सुदृढ़ करेगा तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा।

पावर ग्रिड सहायक कंपनियों में कर सकेगी ज्यादा निवेश : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन को अपनी सहायक कंपनियों में निवेश करने की सीमा 5 हजार से बढ़ा कर 7.5 हजार करोड़ कर दी है। इस मंजूरी से पावरग्रिड को अपने मुख्य व्यवसाय में निवेश बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इससे गैर-जीवाश्म-आधारित स्रोतों से 500 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंगलवार को इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने राष्ट्रीय मीडिया केन्द्र में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। इस मंजूरी से पावरग्रिड की प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की अनुमति सीमा मौजूदा 5 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 7.5 हजार करोड़ रुपये हो गई है। हालांकि कंपनी की कुल संपत्ति के 15 प्रतिशत की मौजूदा सीमा बनी रहेगी। अब पावरग्रिड पूंजी-गहन ट्रांसमिशन परियोजनाओं, जैसे अल्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए बोलियों में भाग ले सकता है। इसके अतिरिक्त, यह महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए बोलीदाताओं के चयन हेतु टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। इससे बेहतर मूल्य निर्धारण सुनिश्चित होगा और अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

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