AMIT RANJAN
सिमडेगा/कोलेबिरा : भारतीय संस्कृति अपने पर्व त्यौहारों की वजह से ही इतनी फली-फूली लगती है। यहां हर पर्व और त्यौहार का कोई ना कोई महत्व होता ही है। कई ऐसे भी पर्व हैं जो हमारी सामाजिक और पारिवारिक संरचना को मजबूती प्रदान करते हैं । इनमें से ही एक है जीवित्पुत्रिका व्रत। ग्रामीण इलाकों में “जीउतिया” के नाम से जाना जाता है। जीवित्पुत्रिका यानि जीवित पुत्र के लिए रखा जाने वाला व्रत। यह व्रत वह सभी सौभाग्यवती स्त्रियां रखती हैं जिनको पुत्र/पुत्री होते हैं और साथ ही जिनके पुत्र नहीं होते वह भी पुत्र कामना और बेटी की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं।
वही पुत्र की दीर्घायु की कामना को लेकर रखे जाने वाले जीवित्पुत्रिका व्रत कोलेबिरा प्रखंड में रविवार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पूरे जिले की माताओं नेजीवित्पुत्रिका व्रत के लिए निर्जला व्रत रह कर अपने पुत्रों की दीर्घायु होने की कामना की। दोपहर से ही जिले की व्रती महिलाएं अपने परिवार व पुत्रों के साथ जिस घर मे पहान पुजार द्वारा जितिया पेड़ की डाली स्थापित किया गया उस घर में व्रती माताएं गई वहां पुरोहितों के द्वारा सभी व्रतियों को विधि विधान पूर्वक पूजन अर्चन कराई गया। समूह में सभी व्रतियों और श्रद्धालुओं को पंडित पुरोहित के द्वारा जीमूतवाहन की कथा का श्रवण कराया गया। पर्व को लेकर महिलाओं में गजब का उत्साह रहा। इस दौरान युवा से लेकर वृद्ध महिलाओं ने अपने बच्चों की कुशलता के लिए निर्जला व्रत रखा। वहीं ब्रती माताओं द्वारा बृहस्पतिवार को सूर्योदय के बाद जीउतिया की माला को अपने बच्चों के गर्दन में डाल वे उपवास तोडेंगी साथ ही पुत्र पुत्री पौत्र आदि की लंबी उम्र के लिए मंगलकामना करेगी।
