मेसरा में दिखा ‘अनेकता में एकता’ का अनूठा संगम,भाईचारे के साथ संपन्न हुए ईद और सरहुल

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News By Mustaffa

मेसरा (राँची): बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र में शनिवार को सांप्रदायिक सौहार्द और साझा संस्कृति की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। क्षेत्र में इस्लाम धर्म का पवित्र त्योहार ईद-उल-फितर और प्रकृति का महापर्व सरहुल पूरे हर्षोल्लास,शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। एक ओर जहाँ ईदगाहों में खुदा की इबादत में सिर झुके,वहीं दूसरी ओर मांदर की थाप पर थिरकते कदम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते नजर आए। ​सुबह से ही मेसरा और आसपास के क्षेत्रों में ईद की रौनक छाई रही। सफेद लिबास और सिर पर टोपी पहने छोटे-बड़े सभी मस्जिदों और ईदगाहों की ओर रुख करते दिखे। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। बच्चों में ईदी को लेकर खासा उत्साह रहा। वहीं दूसरी ओर,सरहुल के अवसर पर पूरा क्षेत्र आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। पारंपरिक लाल-सफेद पाढ़ वाली साड़ियों में सजी महिलाएं और माथे पर पगड़ी बांधे युवाओं के जत्थों ने अपनी पारंपरिक धुन पर नृत्य किया। प्राकृतिक फूलों और टहनियों से सजे जुलूस में लोग एक-दूसरे को बधाई देते और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेते दिखे। ​प्रशासन की मुस्तैदी: शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीआईटी मेसरा ओपी पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। सभी जगह पुलिस बल की तैनाती की गई थी। शांतिपूर्ण माहौल पर संतोष व्यक्त करते हुए थाना प्रभारी अजय कुमार दास ने कहा कि क्षेत्र में शांति और भाईचारा बनाए रखने में स्थानीय लोगों का पूर्ण सहयोग मिला। पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क था,लेकिन जनता की सूझबूझ ने इस साझा उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। इस अवसर पर मुखिया राहुल मुंडा एवं केदल के समाजसेवी महमुद अंसारी ने संयुक्त रूप से क्षेत्रवासियों को बधाई दी। वहीं,समाजसेवी एवं शिक्षा जगत के स्तंभ मनरखन महतो ने भी अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ईद की इबादत और सरहुल की प्रकृति पूजा का यह संगम हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए आपसी प्रेम और साझा संस्कारों का सबसे बड़ा पाठ है। स्थानीय प्रबुद्ध जनों के सहयोग से दोनों पर्व बिना किसी खलल के संपन्न हुए।

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