Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष ने महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर प्रेरणा स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की। लोकसभा सचिवालय के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, सांसदगण, पूर्व सांसदगण, लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने आज संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। महात्मा ज्योतिराव फुले, जिन्हें लोकप्रिय रूप से महात्मा फुले के नाम से जाना जाता है, 19वीं सदी के भारत के प्रमुख सामाजिक सुधारकों में से एक थे। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं को समाप्त करने के लिए समर्पित किया और गरीबों, किसानों तथा समाज के अन्य वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया। उन्होंने 1873 में ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शोषण को रोकना और भेदभावपूर्ण प्रथाओं से पीड़ितों को मुक्ति दिलाना था। वे उन शुरुआती विचारकों में भी थे जिन्होंने कृषि के महत्व, किसानों के कल्याण और कृषकों के लिए वैज्ञानिक शिक्षा पर जोर दिया। महात्मा ज्योतिराव फुले 1876 से 1882 तक पुणे नगर पालिका के सदस्य रहे और 1888 में गरीबों एवं वंचितों की मुक्ति में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘महात्मा’ तथा ‘भारत के बुकर टी. वॉशिंगटन’ की उपाधियों से सम्मानित किया गया। संसद भवन परिसर में स्थापित महात्मा ज्योतिराव फुले की 12 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा, जिसका निर्माण राम वी. सुतार द्वारा किया गया था और जिसका अनावरण 3 दिसंबर 2003 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया था, वर्तमान में परिसर के भीतर प्रेरणा स्थल पर स्थित है।
महात्मा ज्योतिराव फुले को नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, योगदान को किया याद : महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर देशभर के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और शिक्षा, समानता तथा सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महात्मा ज्योतिराव फुले को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से वंचितों, शोषितों और महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुले। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महात्मा फुले ने अपना संपूर्ण जीवन वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया और शिक्षा एवं सामाजिक न्याय के लिए उनका संघर्ष आज भी प्रेरणास्रोत है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि महात्मा फुले शिक्षा को समाज सुधार का सबसे प्रभावी साधन मानते थे। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किए और सत्यशोधक समाज की स्थापना कर समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फुले के विचार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘अंत्योदय’ जैसे संकल्पों में आज भी झलकते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें भारत की शैक्षिक क्रांति का जनक बताते हुए दलितों के उत्थान और महिला सशक्तिकरण के लिए उनके समर्पण को याद किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महात्मा फुले को ‘क्रांतिसूर्य’ बताते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना उनके विचारों का मूल संदेश है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले ने बहुजनों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया और उनके विचार आज भी समानता की राह दिखाते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है, जब हर व्यक्ति को शिक्षा, सम्मान और अवसर मिले, यह सीख हमें महात्मा ज्योतिराव फुले से मिलती है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महात्मा ज्योतिराव फुले को महिला शिक्षा का अग्रदूत बताते हुए उनके योगदान को वैचारिक क्रांति का आधार बताया। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी महात्मा ज्योतिराव फुले को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक न्यायपूर्ण और शिक्षित समाज का निर्माण किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने महात्मा ज्योतिराव फुले के 200वीं जयंती समारोह की शुरुआत की : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी 200वीं जयंती समारोह की औपचारिक शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने महात्मा फुले को एक दूरदर्शी समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर शनिवार को कहा कि महात्मा फुले महिलाओं और वंचितों के अधिकारों के प्रबल पक्षधर थे और उन्होंने शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी साधन बनाया। आज भी फुले के विचार समाज की प्रगति के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। प्रधानमंत्री ने हिंदी, गुजराती और मराठी समेत तामाम भाषाओं में अलग-अलग पोस्ट में कहा कि महात्मा ज्योतिराव समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित दूरदर्शी समाज सुधारक थे। उन्होंने महिलाओं और वंचितों के अधिकारों की पैरवी की और शिक्षा को सशक्तिकरण का साधन बनाया। इस वर्ष हम उनकी 200वीं जयंती समारोह की शुरुआत कर रहे हैं। उनके विचार समाज की प्रगति के लिए हमें मार्गदर्शन देते रहें। उल्लेखनीय है कि महात्मा ज्योतिराव फुले को लोकप्रिय रूप से महात्मा फुले के नाम से जाना जाता है। वह 19वीं सदी के भारत के प्रमुख सामाजिक सुधारकों में से एक थे। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं को समाप्त करने के लिए समर्पित किया। उन्होंने 1873 में ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शोषण को रोकना और भेदभावपूर्ण प्रथाओं से पीड़ितों को मुक्ति दिलाना था। वह साल 1876 से 1882 तक पुणे नगर पालिका के सदस्य रहे और 1888 में गरीबों एवं वंचितों की मुक्ति में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘महात्मा’ तथा ‘भारत के बुकर टी. वॉशिंगटन’ की उपाधियों से सम्मानित किया गया। संसद भवन परिसर में स्थापित महात्मा ज्योतिराव फुले की 12 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा, जिसका निर्माण राम वी. सुतार द्वारा किया गया था और जिसका अनावरण 3 दिसंबर 2003 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया था, वर्तमान में परिसर के भीतर प्रेरणा स्थल पर स्थित है।
