Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : अखिल भारतीय लोकपाल (मनरेगा) फाउंडेशन ने ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार से मनरेगा लोकपालों से संबंधित विभिन्न लंबित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक प्रावधान करने की अपील की है। इस संबंध में देशभर के लोकपालों का एक प्रतिनिधिमंडल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मिला। प्रतिनिधिमंडल में झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और तेलंगाना राज्यों के लोकपाल शामिल थे। फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास वाधेय एवं राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. भूपेन्द्र कुमार गंगवार द्वारा संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजे गए पत्र में बताया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 के तहत नियुक्त लोकपाल वर्तमान में कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
कार्यकाल से जुड़ी समस्या : पत्र में उल्लेख किया गया है कि लोकपालों का कार्यकाल बार-बार अल्प अवधि के लिए बढ़ाया जा रहा है, जिससे कार्य में अस्थिरता बनी रहती है। फाउंडेशन ने कार्यकाल को स्थायी रूप से 5+5 वर्षों के लिए निर्धारित करने तथा कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई नियुक्ति या विस्तार तक निरंतर कार्य करने की अनुमति देने की मांग की है। वर्तमान ₹2250 प्रति बैठक की फीस को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर ₹5000 प्रति बैठक करने की मांग की गई है। साथ ही लोकपालों को राज्य के क्लास-1 अधिकारियों के समान टीए/डीए एवं अन्य सुविधाएं देने की अपील की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि कई जिलों में लोकपालों को कार्यालय, स्टाफ, वाहन जैसे आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे कार्य निष्पादन प्रभावित हो रहा है। फाउंडेशन ने लोकपाल कार्यालयों के लिए स्वतंत्र बजट एवं संसाधनों की व्यवस्था की मांग की है। लोकपाल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) का दर्जा देने की सिफारिश की गई है, ताकि लोकपाल स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
अन्य मांगें : इसके अतिरिक्त, लोकपालों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के निरीक्षण एवं शिकायत निवारण का अधिकार देने की मांग भी की गई है। फाउंडेशन ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर लोकपाल प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएगी। सूत्रों के अनुसार, यह भी चर्चा हुई है कि नई नियुक्ति होने तक वर्तमान लोकपालों से ही कार्य लिया जाए। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा जल्द ही राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।
