Eksandeshlive Desk
वाशिंगटन : नेपाल में तीन सप्ताह बाद होने जा रहे संसदीय चुनावों की तैयारियों के बीच अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने देश शांतिपूर्ण मतदान होने पर भरोसा जताया है और कहा है कि वह आगामी सरकार के साथ सहयोग के लिए तैयार है। ट्रम्प प्रशासन में दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर ने बुधवार को अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रिज़ेंटेटिव्स की विदेश मामलों की दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति में बोलते हुए नेपाल और बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर अमेरिका का रुख स्पष्ट किया। कपूर ने कहा, “नेपाल के संदर्भ में हमें विश्वास है कि वहां सुरक्षित और शांतिपूर्ण चुनावी प्रक्रिया होगी, और जो भी जीतकर आएगा, हम उसके साथ काम करने के लिए तैयार हैं।”
नेपाल में पिछले सितंबर में हुए सत्ता परिवर्तन की ओर संकेत करते हुए उन्होंने आगे कहा, “ये दोनों (नेपाल और बांग्लादेश) युवा आंदोलनों के उदाहरण हैं, जिन्होंने पुरानी सरकारों को हटाकर अपने देशों में लोकतांत्रिक भागीदारी के अवसर पैदा किए।” सुनवाई के दौरान उपसमिति अध्यक्ष बिल हुइज़ेंगा ने चीन के बढ़ते प्रभाव और सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “चीन ने भारत, नेपाल और भूटान के साथ अपनी सीमाओं को कड़ा किया है और सैन्य आकांक्षाओं को बल देने के लिए अवसंरचना का निर्माण कर रहा है।” इसी तरह, डेमोक्रेटिक पार्टी की रैंकिंग सदस्य सिडनी कामलागर-डोव ने नेपाल के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन को एक अवसर के रूप में बताया। उन्होंने नेपाल में गत वर्ष सितंबर महीने में हुए सत्ता परिवर्तन और 2024 में बांग्लादेश में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा, “ये बड़े राजनीतिक परिवर्तन उत्तरदायी शासन की बढ़ती क्षेत्रीय मांग को समर्थन देने के लिए हमारी लोकतंत्र सहायता को रणनीतिक रूप से उपयोग करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं। ये दोनों युवा आंदोलनों द्वारा पुराने शासन को हटाकर लोकतांत्रिक सहभागिता के अवसर सृजित करने के उदाहरण हैं।” बांग्लादेश में गुरुवार को चुनाव संपन्न हो चुके हैं, जबकि नेपाल में फागुन 21, (पांच मार्च 2026) को मतदान होना है। कपूर ने कहा कि वाशिंगटन को दोनों देशों में चुनावी प्रक्रिया के सुचारु रहने की अपेक्षा है।
सहायक विदेश मंत्री कपूर ने नेपाल और बांग्लादेश सहित पूरे क्षेत्र को लेकर अमेरिकी दृष्टिकोण से सांसदों को अवगत कराते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में किसी एक शक्ति के वर्चस्व को रोकना अमेरिका की प्राथमिकता है। कपूर ने चीन के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में किसी एक शक्ति का वर्चस्व रोकना अमेरिका का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा, “दक्षिण एशिया पर प्रभुत्व जमाने वाली शत्रुतापूर्ण शक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है। अमेरिका को इसे रोकना होगा और इस क्षेत्र को स्वतंत्र एवं खुला बनाए रखना होगा।” अमेरिकी उपसमिति में माना गया कि भारत और चीन के बीच रणनीतिक रूप से स्थित नेपाल एक संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थान रखता है—इस पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों दलों में सहमति है। कपूर के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन, नेपाल के राजनीतिक परिवर्तन को केवल आंतरिक लोकतांत्रिक विकास के रूप में ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के हिस्से के रूप में भी देखता है। मालदीव, श्रीलंका, भूटान जैसे देश अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखते हैं, लेकिन वे दबावपूर्ण प्रभावों के जोखिम में भी रहते हैं।
