नेपाल के गृहमंत्री का निर्देश, नेपाल की हिंसक घटनाओं में शामिल युवाओं की गिरफ्तारी न की जाए

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू : अंतरिम सरकार के गृहमंत्री ओमप्रकाश आर्यल ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह 8 और 9 सितंबर के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं में शामिल युवाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए। पुलिस ने हाल ही में पुलिस चौकियों को आग लगाने, हथियारों को लूटने और सार्वजनिक कार्यालयों पर हमला करने के लिए कई युवाओं को गिरफ्तार किया है। प्रदर्शन के दौरान काठमांडू और देश भर में सैकड़ों सरकारी कार्यालयों में आग लगा दी गई। 3,000 से अधिक पुलिस हथियारों को लूट लिया गया।

मानव और भौतिक नुकसान की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन : यही नहीं, प्रदर्शन के दौरान सिंहदरबार, सुप्रीम कोर्ट, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास सहित राज्य के प्रमुख संस्थानों में कई दिनों तक आग लगी रही। गृह मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी करके विरोध प्रदर्शनों से मानव और भौतिक नुकसान की जांच के लिए पूर्व न्यायमूर्ति गौरी बहादुर कार्की के तहत एक न्यायिक आयोग के गठन की घोषणा की है। मंत्रालय ने तर्क दिया कि तत्काल कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी, क्योंकि आयोग के पास घटनाओं का अध्ययन करने और कानूनी कदमों की सिफारिश करने का जनादेश है। आर्याल ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चंद्रकुबेर खापुंग को एक लिखित आदेश में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों को आगे नहीं बढ़ाने का निर्देश दिया है।

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