नेपाल की जनता अपनी तकदीर लिखने को बेकरार

INTERNATIONAL

Ashutosh Jha

काठमांडू : नेपाल में पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र विक्रम शाह को फिर से इस देश की बागडोर सौंपने तथा नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए विगत एक माह से जो जोर आजमाइश चल रही है वह यहां की वर्तमान गणतंत्रात्मक शासन पद्धति की कलई खोलने के लिए काफी है। नेपाल की सरकार एड़ी-चोटी एक कर भी इस जनविद्रोह को शांत नहीं कर पाई है। नेपाल तिन-तिनकर जल रहा है और आम नेपाली राजशाही की वापसी तथा हिन्दू अधिराज्य के निर्माण के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार बैठे हैं।

इस विषम हालात में राजशाही की वापसी तथा हिन्दू देश पुनः नेपाल के निर्मित होने की निर्णायक लडाई में भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी व उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर आंदोलनकारियों की निगाह टिकी हुई है। काठमांडू उपत्यका के दो लाख से भी अधिक राजशाही समर्थकों का कहना है कि 2008 में जब यहां गणतंत्र आया तो नेपालियों के मन में भरोसा था कि अब नेपाल के दिन बहुरेंगे लेकिन हु‌आ हीक इसके विपरीत। यहां के राजनीतिक दलों के नेताओं ने नेपाल को 17 वर्षों में भ्रष्टाचार, महंगाई, हिंसा, हत्या, अराजकता और निरंतर बिगड़ी स्थितियों का तोहफा दिया। नेपाल ने गणतंत्र आने के दो दशक से भी कम समय में 15 प्रधानमंत्री देखे। नेपाल का जो भी पीएम हुआ उसने अपनी जेब भरी। अपनी पार्टी के छुट्भय्ये नेताओं को खाने-पकाने की खुली छूट दी।

नेपाल की अधिसंख्यक आबादी अपनी बदहाली पर आठ आठ आंसू बहाती रही लेकिन इनकी आवाज नक्कारखाने में तूती जैसी सिद्ध हुई। इस स्थिति से बौखलायी जनता ने राजशाही के दिनों को बेहतर महसूस किया और सड़कों पर उतर आयी। राजशाही को वापस लाने के लिए नित्य आंदोलन यहां चल रहे हैं। जो हालात दिखाई दे रहे हैं उससे नहीं लगता कि हिन्दू राष्ट्र और राजशाही की विधिवत घोषणा के बगैर यहाँ लगी आग बुझेगी। वर्तमान परिवेश में आंदोलन का नेतृत्व राजशाही समर्थक दल राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने ले लिया है। संसद से सड़क तक इस दल के नेता और कार्यकर्ता तथा सैकड़ों राष्ट्रवादी संघ संस्थाएं राजा लाओ, देश बचाओ के उद्‌‌घोष के साथ मैदान में निरंतर कूदते जा रहे हैं।

नेपाल की सरकार और पीएम के पी शर्मा ओली के पूर्व नरेश के विरुद्ध प्रदर्शित तीखे तेवर से आंदोलनकारी और आक्रोशित होते जा रहे हैं। नेपाल की सरकार ने अघोषित रूप से पूर्व नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाह को नजरबंद कर रखा है लेकिन सरकार की यह चेतावनी काठमांडू उपत्यका के निवासियों पर बेअसर है कि शाह को जेल में बंद कर दिया जायेगा। जनता कह रही है कि अगर सरकार में दम है तो ऐसा कर दिखाए, फिर हम नेपाल की तकदीर खुद लिख लेंगे।