राष्ट्रपति भवन के बाहर लगा आंदोलनकारियों का जमावड़ा, सेना ने आगे बढ़ने पर कार्रवाई की दी चेतावनी
Eksandeshlive Desk
काठमांडु : नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता खत्म होती नजर नहीं आ रही है। ‘जेन-जी’ प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वे संसद भंग करने की मांग पर अड़े हुए हैं। ‘जेन-जी’ आंदोलनकारियों का कहना है कि वे सभी बैठकों में अपनी अनिवार्य भागीदारी चाहते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस आंदोलन को को-ऑर्डिनेट कर रहे संगठन ‘हामी नेपाल’ ने इस बारे में अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के जरिये ये जानकारी दी है। संगठन का कहना है कि इसके अध्यक्ष सुदान गुरुंग शुक्रवार को एक बैठक के लिए औपचारिक तौर पर राष्ट्रपति भवन गए थे। प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव रखा है। इस बीच, प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा राष्ट्रपति भवन के बाहर दिखा। हालांकि सेना ने उन्हें वहां रोका और कहा कि आगे बढ़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
काठमांडू में कर्फ्यू में ढील दी गई, लोग घरों से निकले : इससे पहले बीती रात 10 बजे से लेकर आज सुबह 3 बजे तक चली बैठक में इन मुद्दों को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई थी। सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने को लेकर सहमति का दावा भी किया गया है, लेकिन संसद विघटन पर राजनीतिक दलों ने अपनी आपत्ति जताई है। कई दिनों की हिंसक घटनाओं के बाद नेपाल की राजधानी के कुछ हिस्सों में शुक्रवार सुबह सीमित सार्वजनिक गतिविधि की वापसी देखी गई। नेपाली सेना ने अस्थायी रूप से कर्फ्यू हटा लिया है।सेना ने एक बयान जारी कर सुबह 6 बजे से 11 बजे के बीच आवश्यक उद्देश्यों के लिए बाहर निकलने की अनुमति दी है, जिससे बाजारों में भीड़भाड़ बढ़ गई है। शाम 5 बजे से शाम 7 बजे तक दूसरी छूट अवधि निर्धारित की गई है। सेना के जनसंपर्क और सूचना निदेशालय के अनुसार, शेष दिन के दौरान सख्त प्रतिबंध बना हुआ है। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है। हालांकि चिकित्सा कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, सरकारी कर्मचारियों, पत्रकारों और एम्बुलेंस और आवश्यक श्रमिकों को परिचय पत्र पर यात्रा करने की अनुमति है। सेना ने कहा कि रात का कर्फ्यू शुक्रवार शाम 7 बजे फिर से शुरू होगा और शनिवार सुबह 6 बजे तक जारी रहेगा। साथ ही सेना ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्थितियों को देखते हुए योजनाओं को बढ़ाया जा सकता है। 8 और 9 सितंबर को जेन जी के नेतृत्व वाले दो दिनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थितियां बुरी तरह बिगड़ गई थी, जिसमें कम से कम 34 लोग मारे गए और एक हजार से अधिक घायल हो गए।
जेन जेड प्रदर्शन की आड़ में बाहर आए पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने को फिर जाना होगा जेल : नेपाल में सत्ता परिवर्तन के लिए हुए जेन जेड के प्रदर्शन की आड़ में देशभर में जेल ब्रेक की घटनाएं हुईं। इनमें 17 हजार कैदियों के जेल से फरार होने की घटना सामने आई है। इनमें कई वीवीआईपी कैदी से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन व खूंखार आतंकवादी तक शामिल हैं। 9 सितंबर को जिस समय काठमांडू में प्रदर्शनकारी सरकारी भवनों और नेताओं व मंत्रियों के घरों पर हमला और आगजनी कर रहे थे, उसी समय सबसे पहला जेल ब्रेक ललितपुर के नक्खू जेल में हुआ। सहकारी घोटाले में आरोपी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने भी इस जेल में बंद थे। उनको छुड़ाने के लिए ही यह जेल ब्रेक किया गया। दो बार गृहमंत्री रहे रवि लामिछाने के समर्थकों ने जेल पर हमला कर सबसे पहले उनको बाहर निकाल लिया। रवि लामिछाने के कारण उस जेल में बंद 900 से अधिक कैदी जेल से बाहर आ गए। पूरा जेल खाली हो गया और जेल में तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई। उसके बाद बाद ही काठमांडू सहित देशभर में जेल ब्रेक की घटनाएं शुरू हो गईं। इस जेल ब्रेक के दौरान 9 कैदियों के मारे जाने की भी खबर है।
जेल प्रशासन ने जेल से फरार सभी कैदियों को वापस जेल में आने को कहा : अब जेल प्रशासन ने जेल से फरार सभी कैदियों को वापस जेल में आने को कहा है, ऐसा नहीं करने पर उनकी सजा और बढ़ाने की चेतावनी दी है। रवि के जेल से निकलने के बाद उन्होंने दावा किया था कि उन्हें गृह सचिव के फैसले के बाद जेल से रिहा किया गया है। हालांकि उनके कानून के विपरीत जेल से बाहर आने की आलोचना के बाद उन्होंने फिर सफाई दी कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे तो वो जेल वापस आने के लिए तैयार हैं। अब जेल प्रशासन ने सूचना प्रकाशित कर रवि लामिछाने सहित सभी फरार कैदियों को अपने अपने जेलों में वापस जाने को कहा है। जेल प्रशासन की सूचना के बाद सैकड़ों कैदी जेल में वापस आने भी लगे हैं। काठमांडू की सेंट्रल जेल से फरार हुए 3300 कैदियों में से 400 सौ से अधिक कैदी खुद वापस आ गए। इसी तरह नक्खू जेल में रवि लामिछाने के साथ फरार हुए 900 में से 400 से अधिक कैदी के दोबारा वापस आने की जानकारी पुलिस के तरफ से दी गई है। देशभर से सैकड़ों कैदियों को दोबारा हिरासत में लिया गया है। भारत के सीमावर्ती जिलों से भी 100 से अधिक कैदियों को नियंत्रण में लेकर उन्हें नेपाल को सौंपा गया है।
