नेपाल में बालेन्द्र शाह मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या 40 प्रतिशत पहुंची

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू : नेपाल में बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत तक बढ़ाकर समावेशी शासन पर जोर दिया है। बालेन्द्र शाह के मंत्रिमंडल में शामिल कुल 15 मंत्रियों में 6 महिलाओं को शामिल किया गया है, जो कुल 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है। बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में बने नए मंत्रिमंडल में सोविता गौतम को कानून, न्याय और संसदीय मामलों की मंत्री, गीता चौधरी को कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्री, सीता बादी को महिला, बालबालिका एवं ज्येष्ठ नागरिक मंत्री और निशा मेहता को स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्री नियुक्त किया गया। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सिफारिश पर बाद में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने शुक्रवार को ही गौरी यादव को उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री नियुक्त किया।

प्रधानमंत्री शाह की प्रेस विशेषज्ञ दीपा दाहाल ने कहा कि यह नेपाल में कैबिनेट स्तर पर महिलाओं की भागीदारी के लिए एक नया मानक स्थापित करता है। उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार समावेशी और समानतापूर्ण शासन के लिए प्रतिबद्ध है। 40 प्रतिशत महिला मंत्रियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि परिवर्तनकारी राजनीति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता व्यवहार में लागू हो रही है।” नेपाल के संविधान में राज्य निकायों में कम से कम 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई है, लेकिन पिछली सरकारें अक्सर इस सीमा को पूरा नहीं कर पाई थीं। वर्तमान मंत्रिपरिषद ने इस आवश्यकता को पार कर लिया है। नेपाल की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पूर्व सदस्य मोहना अंसारी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि नेपाल में मंत्रिपरिषद में महिलाओं की इतनी अधिक भागीदारी पहले कभी नहीं रही। उन्होंने कहा, “संख्यात्मक रूप से यह अब तक मंत्रिपरिषद में महिलाओं की सबसे अधिक भागीदारी है। 15 सदस्यीय कैबिनेट में 6 महिलाओं का होना समावेशी नेतृत्व की दिशा में एक उदाहरण है।” उन्होंने यह भी कहा कि रूबी ठाकुर का डिप्टी स्पीकर चुना जाना व्यापक समावेशी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नेपाल की वरिष्ठ अधिवक्ता मीरा ढुंगाना ने कहा कि महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी न केवल अपेक्षाओं को पूरा करती है, बल्कि नीति निर्माण को महिलाओं के मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने का अवसर भी देती है। उन्होंने भविष्य में इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव दिया। अधिवक्ता भावना दहाल ने कहा कि प्रतिनिधित्व के साथ-साथ विविधता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और वर्तमान मंत्रिपरिषद महिलाओं के नेतृत्व में संख्यात्मक और समावेशी विविधता को बढ़ावा देकर सकारात्मक संदेश दे रही है।

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