नेपाल में संसदीय चुनावों के लिए 64 राजनीतिक दलों के कुल 3,424 उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू : नेपाल में अगले साल होने वाले संसदीय चुनावों के लिए केवल 64 राजनीतिक दलों ने समानुपातिक (पीआर) प्रणाली के तहत उम्मीदवारों की बंद सूची निर्वाचन आयोग में जमा कराई है। निर्धारित समयसीमा के भीतर 64 राजनीतिक दलों के कुल 3,424 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। निर्वाचन आयोग में पंजीकृत कुल 100 दलों में से सिर्फ 64 दलों ने ही सोमवार और मंगलवार को अपनी पीआर उम्मीदवार सूची निर्वाचन आयोग को सौंपी है। निर्वाचन आयोग के अनुसार 22 दलों ने समानुपातिक प्रणाली के तहत सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों का पंजीकरण कराया है, जबकि शेष दलों ने न्यूनतम 10 से लेकर अधिकतम 101 उम्मीदवारों तक की बंद सूची प्रस्तुत की है। आयोग के अनुसार कुछ दल एकल चुनाव चिह्न के तहत चुनाव लड़ेंगे। इस बार 64 दल कुल 58 चुनाव चिह्नों के माध्यम से चुनाव में भाग ले रहे हैं। इनमें से 54 दल अपने-अपने अलग चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि 10 दल चार चुनाव चिह्नों के तहत चुनावी प्रतिस्पर्धा में उतरेंगे।

पीएम कार्की ने कोई भी राजनीतिक मांग शांतिपूर्ण तरीके से रखने को कहा : नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने मंगलवार को नेपाली राजनीतिक कार्यकर्ता और चिकित्सा उद्यमी दुर्गा प्रसाईं से अपनी मांगें और शिकायतें शांतिपूर्ण माध्यमों से उठाने का आग्रह किया। बालुवाटार में हुई मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देश अब और अस्थिरता तथा अशांति को बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक समाधान का रास्ता चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से जनता की स्वीकृति हासिल करने में ही निहित है। कार्की ने कहा कि देश को अनेक कठिन परिस्थितियों से निकालकर शांति और व्यवस्था की ओर लाया गया है। चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार माहौल में हम सभी पक्षों से जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपेक्षा करते हैं। प्रधानमंत्री ने शांति के प्रतीक के रूप में प्रसाईं को भगवान गौतम बुद्ध का चित्र भी भेंट किया और सद्भाव बनाए रखने के महत्व को दोहराया। उन्होंने कहा कि हम न्याय के पक्ष में खड़े हैं। हम न तो सत्ता के लिए हैं और न ही व्यक्तिगत सुख-सुविधा के लिए। हमने भ्रष्टाचार को समाप्त करने और उत्पीड़ित व हाशिए पर पड़े वर्गों को न्याय दिलाने की प्रक्रियाएं शुरू की हैं। भले ही इसके परिणाम तुरंत दिखाई न दें, लेकिन नींव बहुत सोच-समझकर रखी जा रही है। सरकार आपकी ओर से उठाई गई कई वैध चिंताओं को संबोधित करने पर भी काम कर रही है और आगे भी इस विषय पर संवाद जारी रहेगा।

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