नेपाल प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक में ही हंगामा, ओली की गिरफ्तारी का विरोध

INTERNATIONAL

Eksandeshlive Desk

काठमांडू : नवनिर्वाचित प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक शुरू होते ही बाधित हो गई, जब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने सदन के भीतर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्ताई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यूएमएल के सांसद बैठक शुरू होते ही खड़े होकर नारेबाजी करने लगे और कार्यवाही में बाधा डाली। बैठक की अध्यक्षता कर रहे अर्जुननरसिंह केसी ने उन्हें अपनी सीट पर बैठने और सदन की कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया। विरोध कर रहे सांसदों ने उनकी बात नहीं मानी, जिसके बाद अध्यक्ष ने यूएमएल सांसद गुरु बराल को अपनी बात रखने के लिए दो मिनट का समय दिया। बराल ने पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए उनकी गिरफ्तारी को अवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि भीड़ को नियंत्रण करने का काम पुलिस प्रशासन का है जिसमें प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं होती है। यूएमएल सांसद बराल ने कहा कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के आधार पर कार्रवाई कर रही है जो विधि के शासन के खिलाफ है। उन्होंने ओली की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए जेन जी आंदोलन को लेकर निष्पक्ष जांच की बात उठाई। संसद के नए कार्यकाल की शुरुआत में ही इस तरह का व्यवधान आगे आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच संभावित तनाव का संकेत देता है।

पूर्व प्रधानमंत्री ओली को स्वास्थ्य कारणों से नहीं मिली छुट्टी, अस्पताल में दर्ज हुए बयान : पिछले साल सितंबर में जेन जी आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को स्वास्थ्य कारणों से त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल से छुट्टी नहीं मिली है, इसलिए पुलिस और और जिला सरकारी वकील कार्यालय की टीम अस्पताल पहुंचकर उनका बयान दर्ज कर रही है। काठमांडू जिला पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पवन कुमार भट्टराई ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद पूर्व पीएम ओली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करा रहे हैं और फिलहाल अस्पताल से तुरंत छुट्टी मिलने की स्थिति में नहीं हैं। डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति के कारण तुरंत डिस्चार्ज संभव नहीं बताया है, इसलिए अस्पताल में ही बयान लिया जा रहा है। ओली को पिछले शनिवार को उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था और अगले दिन अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक अभी जिला पुलिस कार्यालय की हिरासत में हैं, जहां उनका बयान भी दर्ज किया जा रहा है। उनका बयान पास के सरकारी वकील कार्यालय में लिया गया। ओली और लेखक को पहले जिला अदालत में पेश किया गया था, जहां अदालत ने पुलिस को पांच दिन की रिमांड की अनुमति दी थी। अब गुरुवार को इस रिमांड को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। लेखक के लिए अगली रिमांड प्रक्रिया वीडियो कॉल के माध्यम से किए जाने की संभावना है, जैसा कि ओली के मामले में अस्पताल से किया गया था। इन गिरफ्तारियों का आधार पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में गठित आयोग की सिफारिशें हैं, जिसे ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान हुई हिंसा और क्षति की जांच के लिए बनाया गया था। दोनों नेताओं पर आंदोलन के दौरान हुई मौतों से संबंधित आरोप लगे हैं।

सीपीएन-यूएमएल के केंद्रीय कार्यालय में युवा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, नेतृत्व परिवर्तन की मांग : सीपीएन-यूएमएल से जुड़े युवा सदस्यों ने गुरुवार दोपहर ललितपुर के च्यासल स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भवन को घेरते हुए नेतृत्व में बदलाव की मांग को लेकर धरना दिया। यह प्रदर्शन उसी समूह द्वारा बुधवार को किए गए विरोध कार्यक्रमों के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने महासचिव शंकर पोखरेल का पुतला जलाया था और पार्टी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। युवाओं ने बताया कि सितंबर 2025 के ‘जेन जी आंदोलन’ और 5 मार्च के चुनाव के बाद भी पार्टी नेतृत्व में बदलाव के प्रति प्रतिरोध जारी रहने के कारण उन्हें हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूएमएल नेतृत्व बदलते राजनीतिक माहौल के अनुरूप खुद को ढालने में असफल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में संसदीय दल के नेता के चयन की भी आलोचना की। उनका कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की ही पीढ़ी के वरिष्ठ नेता राम बहादुर थापा को जबरन नियुक्त किया गया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवा नेता सुहांग नेमबांग का अपमान किया गया और उन्हें नेतृत्व पद के लिए चुनाव लड़ने से रोका गया, जिसके विरोध में बुधवार रात काठमांडू में भी प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पार्टी से इन निर्णयों को सुधारने और युवा नेताओं को आगे बढ़ने के अधिक अवसर देने की मांग की है।

आरएसपी अध्यक्ष ने संसद की पहली बैठक में पूर्व सरकार में नियुक्त अधिकारियों से मांगा इस्तीफा : नेपाल में सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने संसद की पहली बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व सरकार द्वारा सार्वजनिक पदों पर नियुक्ति पाने वाले सभी पदाधिकारियों से इस्तीफा देने का आग्रह किया है। गुरुवार को प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक को संबोधित करते हुए लामिछाने ने सार्वजनिक सेवा और विभिन्न निकायों में पूर्व सरकार में नियुक्त पदाधिकारियों से स्वेच्छा से पद छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा और निकायों के पदाधिकारी स्वेच्छा से मार्ग प्रशस्त करें।लामिछाने ने यह भी कहा कि हम पर चौबीसों घंटे निगरानी रखें। उन्हें संसद में बोलने के लिए 25 मिनट का समय दिया गया था। उन्होंने कहा कि जनता ने सिंहदरबार को सिर्फ चलाने के लिए नहीं, बल्कि बदलने के लिए मत दिया है। यह जनादेश सिंहदरबार को चलाने के लिए नहीं, बल्कि बदलने के लिए है। हमने बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को काम शुरू करने के लिए 100 दिनों की जरूरत नहीं है। हमें ‘हनीमून पीरियड’ की जरूरत नहीं है, हम काम शुरू कर चुके हैं।

Spread the love