Ashutosh Jha
काठमांडू : नेपाली कांग्रेस दोलखा के पूर्व अध्यक्ष रुद्र बहादुर खड़का ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि युवा नेतृत्व को इतिहास से सबक लेना चाहिए। उनका मानना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाल में ही हुए विरोध प्रदर्शनों, आगजनी और लूटपाट के बाद उत्पन्न असहज स्थिति का फायदा उठाते हुए पार्टी पर चारों ओर से हमले किए जा रहे हैं और आंतरिक फूट को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्लेषण करते हुए कहा कि चुनाव नजदीक होने की स्थिति में व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए पार्टी सदस्यों को विभाजित करने और नेतृत्व को कमजोर करने के इस खेल ने संगठन को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और इतिहास ऐसे कृत्यों का मूल्यांकन करेगा।
पार्टी के भीतर मौजूदा हालात को देखते हुए खड़का ने टिप्पणी की है कि चुनाव नजदीक होने की स्थिति में पद और प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए किए गए सभी प्रयास अनावश्यक हैं। हालांकि निस्वार्थ भाव से काम करने पर आगामी चुनाव में सफलता निश्चित है, लेकिन वे समझते हैं कि निहित स्वार्थों के लिए की गई गुटबाजी की गतिविधियों ने नतीजों पर संदेह पैदा कर दिया है। उन्होंने इस विचार को कोरी कल्पना बताया है कि पार्टी को केवल उन पुराने नेताओं के योगदान को कम करके ही ऊपर उठाया जा सकता है जिन्होंने लगभग 80 वर्षों तक इसका मार्गदर्शन किया है।खड़का ने युवा पीढ़ी और नई पीढ़ी के युवाओं का अल्पकालिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल किए जाने की हालिया प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की है। नेपाल के कम्युनिस्ट नेताओं और रवि लामिछाने और बालेन शाह जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि कांग्रेस के कुछ युवा नेता भी इसी राह पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि नेतृत्व के पदों पर पहुंचे युवाओं को सस्ती लोकप्रियता के बजाय जिम्मेदारी की गंभीरता को समझना चाहिए। उन्होंने वर्तमान युवा नेतृत्व को 2048 विक्रम संवत् के संसदीय चुनाव और शेर बहादुर देउबा की सफलता के इतिहास की याद दिलाई।
खड़का का तर्क है कि वर्तमान युवा नेताओं को भी वही राजनीतिक उपलब्धियां हासिल करनी चाहिए जो देउबा ने, जो उस समय केवल 48 वर्ष के थे, पश्चिमी नेपाल के 19 में से 18 निर्वाचन क्षेत्रों में नेपाली कांग्रेस को जीत दिलाकर और गृह मंत्री बनकर हासिल की थीं। उन्होंने उन युवाओं को चुनौती दी है जिनमें वयस्क हो चुके वर्तमान नेताओं को चुनौती देने का साहस और क्षमता है, कि वे चुनाव के मैदान में अपनी लोकप्रियता को वोटों में बदलकर साबित करें। खड़का ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान युवा नेतृत्व पर सभी सात प्रांतों में बहुमत वाली एक सरकार बनाने की गंभीर जिम्मेदारी है। उनका दावा है कि उनकी सक्रियता और संघर्ष तभी सार्थक होंगे जब वे शेर बहादुर देउबा की तरह परिणामोन्मुखी प्रदर्शन कर सकें। कांग्रेस और जनता तभी सराहना करेंगे जब युवा नेता अपनी क्षमताओं को चुनाव परिणामों के माध्यम से एक सरकार बनाने में परिवर्तित कर सकेंगे।
