निरंकारी मिशन में दिखा सादगी और आत्मीयता का अनुपम उदाहरण, 12 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

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Eksandeshlive Desk

गया जी : मानव एकता, सादगी और आध्यात्मिक मूल्यों के पावन संदेश को साकार करते हुए संत निरंकारी मिशन द्वारा गयाजी के हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड, चंदौती ब्लॉक के समीप भव्य एवं सादगीपूर्ण सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। यह पावन कार्यक्रम सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की दिव्य उपस्थिति और आशीर्वचनों से अलंकृत हुआ। बिहार एवं झारखंड के विभिन्न जिलों से आए लगभग 12 नवयुगल एक ही मंच से परिणय सूत्र में बंधे और सतगुरु का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने नवजीवन की मंगलमय शुरुआत की। यह समारोह सादगी, समानता, समरसता, सतगुरु की शिक्षाओं एवं आध्यात्मिक मूल्यों का प्रेरणादायी उदाहरण बना। भक्तिमय वातावरण में जयमाला, सांझा हार एवं निरंकारी लावों के मधुर गायन के साथ विवाह संपन्न हुए। इस पावन अवसर पर परिणय सूत्र में बंधने वाले जोड़े मुख्य रूप से समस्तीपुर, सिलिगुड़ी, रानीगंज, गयाजी, रांची, मानपुर, सहरसा, सुपौल, बेगूसराय, जहानाबाद, बक्सर, पहाड़गंज (दिल्ली), बांका, पटना, मसरक शाखाओं से संबंधित रहे। यह सामूहिक विवाह समारोह सादगी, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बना, जहां बिना किसी आडंबर के दिव्य वातावरण में वैवाहिक संस्कार सम्पन्न हुआ।

गयाजी में उत्साहपूर्वक निरंकारी संत समागम का भव्य आयोजन : इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए फरमाया कि विवाह का पवित्र संबंध प्रेम और सम्मान पर आधारित होता है जो सत्कार एवं प्रेम के साथ आगे बढ़ने वाला होता है। परिणय का रिश्ता केवल अधिकार का नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और बराबरी का रिश्ता है, जिसे दोनों को मिलकर निभाना होता है। जीवन में जब इस परमपिता परमात्मा की ज्योति का ज्ञान और सत्संग की प्राथमिकता बनी रहेगी तो दांपत्य जीवन में सदैव सौहार्द, संतुलन और आनंद भी बना रहता है। अंत में सतगुरु माता जी ने शुभकामनाओं सहित कहा कि नवविवाहित जोड़े जीवन की हर परिस्थिति में एक-दूसरे का सम्मान करते हुए, इस निरंकार का आसरा लेकर अपने दाम्पत्य जीवन की सुखद यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाते रहें। यह आयोजन न केवल सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ, बल्कि गयाजी मे मानवता, विश्वबंधुत्व और एकत्व की भावना को सुदृढ़ करने वाला एक ऐतिहासिक अवसर भी बना और इस आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनकर स्वयं को धन्य अनुभव किया। सतगुरु माता जी ने अपने आशीर्वचनों में प्रेम, समर्पण को सफल गृहस्थ जीवन का आधार बताया। सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी की पावन छत्रछाया में गयाजी में आयोजित होने वाले निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ पूर्णता की ओर अग्रसर हैं। हज़ारों श्रद्धालु श्रद्धा और समर्पण भाव से दिन-रात सेवाओं में रत हैं, जिससे साधारण मैदान एक भव्य दिव्य नगरी में परिवर्तित हो चुका है। सुव्यवस्थित पंडाल, आधुनिक एलईडी स्क्रीन और समुचित व्यवस्थाएँ इस समागम को प्रेम, सम्मान और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाने हेतु सुसज्जित हैं। कल से संत समागम का दिव्य आयोजन गयाजी के विशाल मैदानों में भव्यतापूर्वक किया जा रहा है जिसमें समागम के प्रथम दिन 7 मार्च, शनिवार को सत्संग कार्यक्रम का आयोजन दोपहर 2:00 से रात्रि 8:00 बजे तक होगा। तदोपरांत सतगुरु माता जी के पावन प्रवचनों को भक्तजन श्रवण कर अपने जीवन को आनंदित करेंगे। संत समागम के दूसरे दिन 8 मार्च, रविवार को प्रातः 11:00 से सायं 4:00 बजे तक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन होगा, उसके उपरांत सतगुरु माता जी के पावन प्रवचनों को सभी श्रद्धालुगण श्रवण कर सकेगे। निसंदेह, यह संत समागम गयाजी की पावन धरती पर प्रेम, शांति और आध्यात्मिक जागृति का दिव्य संदेश प्रसारित करेगा। इस आध्यात्मिक महापर्व के पावन अवसर पर समस्त श्रद्धालु भक्त एवं जिज्ञासु जन सादर आमंत्रित है।

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