युवा वकीलों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
SUNIL VERMA
रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में दो महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 2nd Surana & Surana – NUSRL National Criminal Law Moot Court Competition में सिम्बायोसिस लॉ स्कूल,नोएडा की टीम विजेता बनी, जबकि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर की टीम उपविजेता रही। वहीं युवा अधिवक्ताओं के लिए आयोजित Continuous Legal Education (CLE) Programme भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
दोनों कार्यक्रमों की शुरुआत 13 मार्च को हुई थी और तीन दिनों तक चले इस आयोजन में देशभर के विधि महाविद्यालयों के छात्र, युवा अधिवक्ता तथा विधि विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रमों का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल के मार्गदर्शन में किया गया।
2nd Surana & Surana – NUSRL National Criminal Law Moot Court Competition के दौरान लॉ स्कूलों में मूट कोर्ट की भूमिका और उसके भविष्य पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए प्रीतम सुराना ने विधि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए भावी वकीलों को तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की सलाह दी। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अंबुज नाथ (सेवानिवृत्त), पूर्व न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय, ने अपने संबोधन में सफल विधिक करियर के लिए ईमानदारी, समर्पण और निरंतर सीखने के महत्व पर बल दिया।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नोएडा की टीम विजेता बनी, जबकि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर की टीम उपविजेता रही। इसी के साथ NUSRL रांची में युवा अधिवक्ताओं के लिए Continuous Legal Education (CLE) Programme भी आयोजित किया गया, जिसमें व्यावसायिक नैतिकता, न्यायालयीन प्रक्रिया, कानूनी अनुसंधान, वकालत कौशल तथा विधि क्षेत्र में उभरती तकनीकी चुनौतियों जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा सत्र आयोजित किए गए।
इस दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संचित्ता तिवारी, डॉ. शुभम श्रीवास्तव, डॉ. मृतुंजय मयंक तथा डॉ. कौशिक बागची ने विधिक पेशे में पेशेवर नैतिकता, प्रैक्टिकल कोर्टरूम प्रोसीजर और एडवोकेसी स्किल्स, होस्टाइल गवाहों से निपटने, तथा मौखिक दलीलों और कोर्टरूम एडवोकेसी की कला जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
दूसरे दिन अधिवक्ता सोनल तिवारी ने Access to Justice, Legal Aid and Public Interest Litigation (PIL) विषय पर सत्र लिया। कार्यक्रम के तीसरे दिन डी. सी. मंडल ने कोर्ट फाइलिंग प्रक्रिया, वकालतनामा औपचारिकताओं और जिला न्यायालय की कार्यप्रणाली पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इसके बाद डॉ. कौशिक बागची ने Natural Justice विषय पर व्याख्यान दिया।
समापन सत्र में झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने केस तैयारी, कानूनी ड्राफ्टिंग और मुवक्किल के साथ प्रभावी संवाद पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को विधिक शोध में प्रामाणिक स्रोतों का उपयोग करने और न्यायालय के समक्ष विनम्रता तथा पेशेवर आचरण बनाए रखने की सलाह दी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि NUSRL युवा वकीलों के साथ-साथ विधि के छात्रों के लिए भी सीखने और कौशल विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विधि शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और पेशेवर कौशल के माध्यम से छात्रों और युवा अधिवक्ताओं को बेहतर मंच प्रदान करने का प्रयास कर रहा है। इन आयोजनों के माध्यम से NUSRL रांची ने विधिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने, छात्रों और युवा अधिवक्ताओं के पेशेवर विकास को प्रोत्साहित करने तथा व्यावहारिक विधिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।
