Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया संकट पर मंगलवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए वक्तव्य की आलोचना की। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री का 20 मिनट का बयान केवल बातों को उलझाने की कोशिश था, जबकि देश गहरे ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री के बदलते और अलग-अलग कूटनीतिक रवैये से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का संतुलन बिगड़ गया है। इजराइल दौरे के बाद भारत को स्पष्ट कूटनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने संसद और देश को भरोसे में नहीं लिया। उन्होंने पूछा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को वापस लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?
भारत को ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बेहतर तैयारी करनी चाहिए : खरगे ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगभग 37-40 भारतीय झंडे वाले जहाज फंसे हैं, जिनमें 1,100 नाविक और करीब 10,000 करोड़ रुपये का माल है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के ईरानी नेतृत्व से बातचीत के बावजूद सुरक्षित रास्ता क्यों सुनिश्चित नहीं किया जा सका? चीन, रूस और जापान जैसे देशों को सुरक्षित मार्ग क्यों दिया जा रहा है, जबकि भारतीय जहाज संकट में हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि भारत ने अपने ऊर्जा आयात को 27 से 41 देशों तक बढ़ाया है। वर्तमान में कौन से देश भारत को एलएनजी, एलपीजी और कच्चा तेल सप्लाई कर रहे हैं और कितनी मात्रा में? खरगे ने कहा कि लड़ाई शुरू हुए आज 25 दिन हो चुके हैं और भारत को ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बेहतर तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री की उस टिप्पणी पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने स्थिति की तुलना कोविड से की थी। खरगे ने कहा कि महामारी के दौरान देश ने भारी पीड़ा झेली थी और अब प्रधानमंत्री का यह कहना कि लोगों को फिर खुद संभालना होगा, बेहद चिंताजनक है।
