Bhaskar Upadhyay
हजारीबाग: झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) कानून पारित किए जाने के बाद शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से हजारीबाग में भव्य आभार यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं, ढोल-नगाड़ा और मांदर की थाप पर झूमर नृत्य करते कार्यकर्ता और समर्थक पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। आभार यात्रा की शुरुआत जिला स्कूल चौक स्थित पुराने समाहरणालय परिसर से हुई। यात्रा इंद्रपुरी चौक, झंडा चौक, बंशीलाल चौक, पुराना बस स्टैंड चौक और जिला परिषद चौक से गुजरते हुए पुनः पुराने समाहरणालय पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समर्थन में नारे लगाए और पेसा कानून को आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
झामुमो जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पेसा कानून का पारित होना आदिवासी समाज के अधिकारों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि इस कानून से आदिवासियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा और उनकी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा। ग्राम सभा को अब गांव से जुड़े विकास कार्यों, जल-जंगल-जमीन, खनिज संसाधनों और सामाजिक मुद्दों पर निर्णायक अधिकार प्राप्त होंगे, जिससे गांव खुद अपने विकास की दिशा तय कर सकेंगे। झामुमो जिला सचिव नीलकंठ महतो ने कहा कि पेसा कानून वर्ष 1996 में बना था, लेकिन लंबे समय तक इसे झारखंड में प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे कैबिनेट से पारित कर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार आदिवासी हितों, स्वशासन और झारखंड के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय सदस्य सुनील शर्मा ने कहा कि पेसा कानून के लागू होने से आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक अधिकार मिलेंगे और लोकतंत्र की जड़ें गांव-गांव तक मजबूत होंगी। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। आभार यात्रा में जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया, जिला सचिव नीलकंठ महतो, केंद्रीय सदस्य सुनील शर्मा, सोनाराम मांझी, गौरव पटेल, विकास राणा, संजय सिंह, जिला प्रवक्ता कुणाल यादव, सतीश दास, राजेश मेहता, सरफराज अहमद, बीरबल कुमार, गणेश मेहता, सत्येंद्र मेहता, अब्दुल सलाम, वीरेंद्र राणा, देवानंद, राम जय मेहता, राजेंद्र कुशवाहा, रामकुमार मेहता, रंजीत मेहता, निसार अहमद, कुदुस अंसारी, श्वेता दुबे, दयानंद मेहता, साजन मेहता, प्रभु मुर्मू, आनंद सोरेन, कपिलदेव चौधरी, संजय प्रजापति, प्रदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल रहे।
