मुख्यमंत्री प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर और सिरमटोली स्थित सरना स्थल पहुंचे
परंपरा के अनुरूप विधिवत् पूजा-अर्चना कर समस्त राज्यवासियों की सुख, समृद्धि, खुशहाली एवं उन्नति की कामना की
Eksandeshlive Desk
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं उनकी धर्मपत्नी विधायक कल्पना सोरेन शनिवार को सिरम टोली रांची स्थित सरना स्थल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सरहुल की पारम्परिक रीति-रिवाज के तहत पूजन कार्य पाहन ने संपन्न कराया तथा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) का फूल खोंसकर उन्हें आशीर्वाद दिया। यह परंपरा प्रकृति एवं मानव के गहरे संबंध का प्रतीक मानी जाती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य वासियों को प्रकृति, संस्कृति एवं समरसता के प्रतीक पावन पर्व सरहुल की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
प्रकृति से ज्यादा ताकतवर व्यवस्था कुछ नहीं : इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सिरमटोली के इस ऐतिहासिक स्थल पर आप सभी का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव से जुड़े सभी लोगों का मैं दिल से शुक्रिया अदा करता हूं तथा धन्यवाद देता हूं कि आज के शुभ अवसर पर आप लोगों ने इस समृद्ध परंपरा एवं रीति-रिवाज की डोर को आगे ले जाने का काम कर रहे हैं। सरहुल एक ऐसा पर्व है जो प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है। प्रकृति से ही मनुष्य की यात्रा शुरू होती और उसी में समाहित होती है। आज प्रकृति के उपासक के रूप में इसे सजाना-संवारना और इसको अपने साथ जोड़े रखने के लिए संकल्प लेने का दिन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से ज्यादा ताकतवर व्यवस्था कुछ नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरहुल महोत्सव हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और आपसी सौहार्द का संदेश देता है। राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक समरसता के प्रतीक इस पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
प्रकृति से ही सभी चीजों का सृजन और प्रकृति में ही विलय : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं उनकी धर्मपत्नी विधायक कल्पना सोरेन शनिवार को आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली, रांची पहुंचे। पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की तथा समस्त झारखंड वासियों के कल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आदिवासी समुदाय के लिए आज एक बहुत बड़ा क्षण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने हमें सरहुल महोत्सव जैसी समृद्ध परंपराओं के निर्वाह की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर दिया है, हम आने वाले समय में अपनी पीढ़ी के कंधों पर इन परंपराओं के निर्वहन का जिम्मा सौंपेंगे। कहा कि प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर प्रकृति नही होता तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अगर प्रकृति ना होती तो संसार में कोई जीव-जंतु भी नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रकृति के द्वारा रचाई और बसाई गई व्यवस्था है और इस व्यवस्था के प्रति आदिवासी समूह की अटूट आस्था है। मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने मांदर बजाकर आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर में आयोजित सरहुल महोत्सव-2026 की खुशियों को दोगुनी कर दी।
समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से हम सभी को जुड़ने की जरूरत है। प्रकृति जब सुरक्षित रहेगी तब हमारा अस्तित्व भी रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में आपा-धापी के बीच जीवनयापन हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से दीर्घकालीन सोच के साथ कुछ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं जिसके तहत हम लोग एक साथ एक मंडप में एक छत के नीचे, एक पेड़ के नीचे एकत्रित होते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को हमें प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। हम सभी लोग प्रकृति की रक्षा करें और अपने जीवन को सुरक्षित करें। मौके पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की एवं विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपनी ओर से झारखंड वासियों को प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
