Eksandeshlive Desk
रांची : नागपुरी साहित्य के युगप्रवर्तक, बहुमुखी प्रतिभा के धनी एवं आधुनिक नागपुरी साहित्य के प्रणेता स्वर्गीय प्रफुल्ल कुमार राय (प्रफुल्ल दा) की जयंती सह नागपुरी दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन रविवार को मोराबादी स्थित स्मृति सभागार (शहीद स्मृति भवन), रांची में प्रातः 11:00 बजे से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों तथा नागपुरी भाषा-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रफुल्ल दा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत वक्तव्य में नागपुरी भाषा परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रफुल्ल कुमार राय ने नागपुरी भाषा और साहित्य को नई दिशा, नई चेतना और आधुनिक स्वर प्रदान किया। उन्होंने उस समय नागपुरी गद्य लेखन को सशक्त आधार दिया, जब साहित्य मुख्यतः पद्य तक सीमित था। वक्ताओं ने स्मरण किया कि एक समय नागपुरी बोलना हीनता का प्रतीक समझा जाने लगा था। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में प्रफुल्ल दा नवजागरण के पुरोधा बनकर उभरे और नागपुरी भाषा को पुनः सम्मान एवं प्रतिष्ठा दिलाने का संकल्प लिया। उनकी प्रमुख कृतियां— ‘सोनझइर’, ‘रिंगचिंगिया’, ‘संकर एक ठो जिनगी’, ‘पंच’, ‘लहरा’, ‘बिसाहा’, ‘एक चकता रउद’, ‘पुस कर राइत’— ने नागपुरी साहित्य को समृद्ध किया। उनकी मुक्तछंद कविता ‘बहथी-बोहाथी’ को नागपुरी साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है।
इस अवसर पर प्रफुल्ल कुमार राय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विशेष काव्य-पाठ भी प्रस्तुत किया गया। डॉ. संजय कुमार षाडंगी ने उनके साहित्यिक अवदान पर भावपूर्ण काव्य-पाठ किया, वहीं डॉ. राम कुमार ने उनके जीवन-संघर्ष और साहित्यिक चेतना को रेखांकित करती कविता प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथियों ने नागपुरी भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। पद्मश्री मुकुंद नायक ने कहा, “नागपुरी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है। जब तक हमारी मातृभाषा जीवित है, तब तक हमारी संस्कृति और अस्मिता भी जीवित रहेगी।” उन्होंने ‘अखरा’ परंपरा को संरक्षित रखने पर बल दिया। पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख ने नागपुरी गीत-संगीत को झारखंड की आत्मा बताते हुए नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का आह्वान किया। पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी डॉ. अरुण उरांव ने कहा कि भाषा किसी समाज की पहचान होती है और नागपुरी का सम्मान करना अपनी सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान है। प्रसिद्ध गायक क्षितिज राय ने युवाओं से नागपुरी को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का आग्रह किया। समारोह में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी साहित्य और कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु दो प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। वर्ष 2026 के लिए नागपुरी भाषा परिषद द्वारा प्रख्यात साहित्यकार एवं कलाकार राकेश रमण (‘रार’) तथा ‘मांदर सम्राट’ मनपूरन नायक को सम्मान प्रदान किया गया। राकेश रमण (जन्म: 29 नवम्बर 1959, एम.ए., निवास: कमलालय, रातू, रांची) पिछले लगभग 46 वर्षों से लेखन, अभिनय, निर्देशन, शोध एवं सामाजिक कार्य में सक्रिय हैं। उनका लोकप्रिय नागपुरी स्तंभ ‘सहिया कर गोईठ’ लगभग 25 वर्षों तक दैनिक प्रभात खबर में प्रकाशित होता रहा। मनपूरन नायक (जन्म: 20 जनवरी 1957, एम.ए. नागपुरी, सेवानिवृत्त वरीय उद्घोषक, आकाशवाणी रांची) नागपुरी लोकसंस्कृति एवं पारंपरिक वाद्य परंपरा के सशक्त संवाहक हैं। वे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों— मनीला, ताइपेई और कनाडा— पर झारखंड की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत कर चुके हैं। कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में पद्मश्री मुकुंद नायक, क्षितिज राय, हरिनंदन माली, शंकर नायक, युगेश महतो, लाली देवी सिंह, सहित अनेक कलाकारों ने नागपुरी गीत प्रस्तुत कर वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथियों द्वारा नागपुरी भाषा एवं साहित्य से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। लोकार्पित पुस्तकों में—झारखंड की परम्परागत कृषि – प्रधान संपादक: डॉ. उमेश नन्द तिवारी; संपादक: डॉ. शकुन्तला मिश्र, डॉ. राम कुमार, स्वर्ण मंजूषा – लेखक: डॉ. कृष्ण कलाधर, डॉ. शकुन्तला मिश्र, डाइन (नागपुरी उपन्यास) – लेखक: मनोहर महान्ती, नागपुरी लोकगीतों में शास्त्रीय संगीत का प्रभाव – लेखक: मनोहर महान्ती, नागपुरी गीत: राग एवं ताल का विश्लेषणात्मक अध्ययन – लेखक: मनपूरन नायक, झारखंड कर गछ-बिरीछ (नागपुरी गीत संग्रह) – लेखक: मनपूरन नायक, काव्य के विविध रूप – लेखक: डॉ. राम कुमार, अनुजा कैथर, काव्यांश: रस-छंद-अलंकार – लेखक: डॉ. राम कुमार, नागपुरी कवि शेख डोमन अली कर प्रतिनिधि गीत – संकलन/संपादन: डॉ. राम कुमार, अनुजा कैथर, नागपुरी सोमरस हरिनन्दन महली ‘निर्मोही’ कर प्रतिनिधि गीत – संपादन: डॉ. राम कुमार, नागपुरी लोकगीतों में जनजीवन – लेखक: डॉ. सुमन कुमार, इन पुस्तकों के लोकार्पण ने समारोह को विशेष साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन नागपुरी विभाग, रांची विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. उमेश नंद तिवारी एवं नागपुरी भाषा परिषद की महासचिव डॉ. शकुंतला मिश्र ने संयुक्त रूप से किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुखदेव साहू द्वारा किया गया। समारोह में पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख, डॉ. गुरुचरण साहू, डॉ. अरुण उरांव, अवधमणि पाठक, क्षितिज राय, धनेंद्र प्रवाही, डॉ. उमेश नंद तिवारी, डॉ. शकुंतला मिश्र, रतन तिर्की, राकेश रमण, महावीर साहू, मनोहर महान्ती, मनपूरन नायक, डॉ. संजय कुमार षाडंगी, डॉ. राम कुमार, डॉ. अजय नाथ शाहदेव, लाल अजय नाथ शाहदेव, कृष्ण जीवन पौराणिक, शशिबाला पौराणिक, डॉ. युगेश महतो, डॉ. मनोज कच्छप, डॉ. कंचन मुंडा, डॉ. पूनम, डॉ. बंदे खलखो, डॉ. सुखदेव साहू, डॉ. शैलेश महतो सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समापन अवसर पर सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि नागपुरी भाषा को शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक स्तर पर और अधिक सशक्त बनाया जाएगा तथा प्रफुल्ल कुमार राय के साहित्य का व्यापक अध्ययन एवं प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रफुल्ल राय जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि नागपुरी अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और साहित्यिक चेतना का प्रतीक है। उनका जीवन और साहित्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा-स्रोत बना रहेगा।
