प्रमाण पत्र के अभाव में हाशिए पर बारी समाज, उग्र आंदोलन की चेतावनी

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रांची: झारखंड में रह रहे बारी समाज के अस्तित्व और अधिकारों को लेकर रविवार को राजधानी के रातू स्थित आर.बी.एस. पब्लिक स्कूल में एक महत्वपूर्ण मोर्चा खुला। झारखंड राज्य बारी संघ की इस बैठक में समाज के प्रबुद्ध जनों ने स्पष्ट किया कि अब वे अपने हक के लिए और अधिक इंतजार नहीं करेंगे। प्रशासनिक अनदेखी से आक्रोश, बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश प्रसाद ने स्थानीय निवास और जाति प्रमाण पत्र न बनने की प्रक्रिया पर गहरा दुख और रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा, बिना प्रमाण पत्र के हमारे युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों और योजनाओं के दरवाजे बंद हैं। यह केवल एक कागजी समस्या नहीं, बल्कि हमारे समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग की गई कि बारी समाज की पहचान से संबंधित इन बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए। बैठक के दौरान पूर्व में किए गए सामाजिक कार्यों की समीक्षा की गई और संगठन को और मजबूत करने पर बल दिया गया। इस अवसर पर अजय कुमार,उदय शंकर प्रसाद, चन्द्रमा प्रसाद बारी, शत्रुघ्न प्रसाद,शिवाजी बारी, डॉ. प्रेम किशोर कश्यप, संजय प्रसाद, ओम प्रकाश बारी और कुन्दन कुमार जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की माटी का अभिन्न हिस्सा होने के बावजूद बारी समाज को अपनी पहचान साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बैठक के समापन पर डॉ. अजीत कुमार राउत ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द सुध नहीं ली,तो समाज सड़क पर उतरने को मजबूर होगा।

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