Eksandeshlive Desk
रांची : झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग (मत्स्य प्रभाग) की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीख पी. के निर्देशानुसार व उनके मार्गदर्शन में झारखंड में मोती पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र (शालीमार), धुर्वा में मोती पालन व कौशल विकास पर चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके तहत पांच दिवसीय (9 से 13 फरवरी, 2026) प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ। इसमें सरायकेला-खरसावां, खूंटी, धनबाद, चतरा, हजारीबाग तथा रांची जिले के मत्स्य कृषक शामिल हुए।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र का वितरण संजय गुप्ता, उप मत्स्य निदेशक (योजना), डॉ.रितेश शुक्ला, प्राध्यापक, संत जेवियर कालेज, बुधन सिंह पूर्ति प्रगतिशील मोती पालक द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप मत्स्य निदेशक (योजना) संजय गुप्ता ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद सभी लोग मछलीपालन के साथ-साथ मोती पालन का कार्य प्रारंभ करें। सरकारी योजनाओं का लाभ उठायें। किसानों को डिजाइनर मोती, गोल मोती, राइस पर्ल के निर्माण के बारे में जानकारी दी गई। सीपियों की सर्जरी, दवाई, सीपियों के पालन हेतु पानी तैयार करना तथा सर्जिकल उपकरणों की जानकारी, साथ ही विपणन के बारे में बताया गया। निदेशक मत्स्य अमरेन्द्र कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को संदेश दिया कि मछलियों का फसल बीमा योजना लागू है, किसान इसका लाभ उठायें। मछुआरों के लिए प्रधानमंत्री सामुहिक दुर्घटना बीमा योजना भी चलाई जा रही है, जिसमें प्रीमियम की राशि सरकार वहन करती है। उन्होंने इसका भी लाभ उठाने के लिए प्रशिक्षणार्थियों को आह्वान किया। प्रशिक्षण में डॉ.रितेश कुमार शुक्ला और बुधन सिंह पुर्ती ने रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रशिक्षणार्थियों को पर्ल कल्चर प्रशिक्षण विधियों के सैद्धांतिक ज्ञान एवं व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि छोटे -छोटे तालाब, डोभा, सिमेंटेड टैंक आदि में भी मोती पालन का काम आसानी से किया जा सकता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन मंजूश्री तिर्की ने किया। इस अवसर पर विभिन्न जिलों के 55 किसान उपस्थित रहे। उक्त जानकारी मत्स्य निदेशालय के मुख्य अनुदेशक प्रशांत कुमार दीपक ने दी।
