अजय राज
*प्रतापपुर (चतरा): कई महीनों से अवैध अल्ट्रासाउंड एवं नर्सिंग होम के खिलाफ लगातार प्रकाशित हो रही खबरों का असर अब ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगा है। मीडिया में मामला उजागर होते ही चतरा के अनुमंडल पदाधिकारी जहूर आलम ने इसे गंभीरता से लेते हुए त्वरित और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आया। इसी कड़ी में मंगलवार को वरीय पदाधिकारियों के निर्देश पर प्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. कुमार संजीव के नेतृत्व में गठित प्रखंड टास्क फोर्स ने प्रतापपुर प्रखंड मुख्यालय में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापेमारी की है।
माँ लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सील, अनन्या नर्सिंग होम पर गिरी गाज
प्रतापपुर थाना और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज कुछ ही दूरी पर स्थित माँ लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड को जांच के दौरान अवैध पाया गया। संचालक द्वारा किसी भी प्रकार के वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। नियमों के घोर उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने तत्काल अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील कर दिया है। वहीं, प्रतापपुर मस्जिद रोड स्थित अनन्या नर्सिंग होम में छापेमारी के दौरान और भी गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहाँ झोलाछाप डॉक्टर उपेंद्र कुमार द्वारा कुंदा प्रखंड के मांझीपाड़ा निवासी एक महिला का अवैध रूप से छोटा ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया। महिला की हालत बिगड़ने पर स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया।
प्रशिक्षण के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़!
छापेमारी के दौरान नर्सिंग होम में मौजूद दो तथाकथित नर्सों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन महीनों से केवल “प्रशिक्षण” ले रही हैं, लेकिन इसके बावजूद मरीजों की देखरेख और इलाज में शामिल थीं। यह खुलासा कई गंभीर सवाल खड़ा करता है— क्या प्रशिक्षण के नाम पर आम लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा था? आखिर इतने लंबे समय तक यह सब कैसे चलता रहा?
प्रशासन पर भी उठे तीखे सवाल
हालांकि एसडीएम जहूर आलम ने साफ कहा है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। वहीं, सीएचसी प्रभारी डॉ. कुमार संजीव ने भी स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी मुंह बाए खड़ा है कि— जब प्रतापपुर में दर्जनों अवैध नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं, तो अब तक व्यापक स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रखंड और जिला प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है? या फिर यह सब ‘मैनेज सिस्टम’ का हिस्सा रहा है?
गरीब की जान की कीमत क्या कुछ नहीं?
आम जनता यह सवाल चीख-चीख कर पूछ रही है कि आखिर कब तक गरीब,निरीह लोग अवैध नर्सिंग होम के चक्कर में अपनी जान और जमा- पूंजी गंवाते रहेंगे? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ दिखावटी, इक्का-दुक्का कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगी?
अब निगाहें प्रशासन पर
खबर के असर से शुरू हुई यह कार्रवाई निश्चित रूप से आम जनता के लिए राहत की खबर है। लेकिन असली परीक्षा अब बाकी है— क्या प्रतापपुर प्रखंड के सभी नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच होगी? क्या अवैध संचालन पर स्थायी रोक लगेगी? क्या दोषियों को वास्तव में कठोर सजा मिलेगी? फिलहाल, सवालों की लंबी कतार के बीच जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह है कि यह सख्ती आगे भी जारी रहती है या फिर समय के साथ ठंडी पड़ जाती है
