Eksandeshlive Desk
तेहरान : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जहां ईरान ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए साफ कहा है कि उसके बुनियादी ढांचे पर कोई भी हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-इजराइल के साथ ईरान का टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और वैश्विक चिंता गहरा गई है। ईरान के समाचार पत्र फिलिस्तीन क्रॉनिकल के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि देश के बुनियादी ढांचे पर कोई हमला होता है तो ईरान बिल्कुल संयम नहीं बरतेगा। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान के पास इज़राइल द्वारा संभावित हमले की खुफिया जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो उसका जवाब बेहद कड़ा होगा। उन्होंने कहा कि ईरानी लोग सिद्धांतों वाले हैं। हम बातचीत के दौरान छिपकर हमला नहीं करते, लेकिन अगर हम पर हमला होता है तो हम ज़ोरदार जवाब देते हैं। इस बयान के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यह संकेत देते दिखाई दे रहे हैं कि ईरान, अमेरिका पर हमला करने की तैयारी कर रहा था। वहीं, ईरान ने खाड़ी के कई देशों में तेल और गैस उत्पादन से जुड़ी कई सुविधाओं को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डाॅलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई है। गौरतलब है कि, पश्चिम एशिया में करीब तीन हफ्ताें से अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध जारी है। इन हमलों में ईरान में लगभग 1,300 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सर्वाेच्च नेता अली हुसैनी ख़ामेनेई कई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इजराइल के अलावा जॉर्डन, इराक और खाड़ी देशों में अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों से भारी नुकसान हुआ है, बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची है और हवाई यातायात के साथ-साथ वैश्विक बाजार भी प्रभावित हुए हैं।
ईरान ने यूएई काे चेताया – हम पर हमला हुआ ताे रास-अल-खैमाह शहर काे तबाह कर देंगे
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमीरात की धरती से ईरान के द्वीपों अबू मूसा और ग्रेटर तुन्ब पर हमला किया गया तो ईरान, यूएई के रास अल खैमाह शहर पर भारी हमले कर उसे तबाह कर देगा। तेहरान ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता के खिलाफ किसी भी “लॉन्चिंग पॉइंट” को निशाना बनाएगा और ऐसी कार्रवाई पहले घोषित की जा चुकी है। समाचार पत्र फिलिस्तीन क्रॉनिकल के अनुसार, ईरान के ‘खातम अल-अनबिया’ केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ुल्फ़िकारी ने स्पष्ट रूप से कहा, “हम रास अल खैमाह पर हमला करेंगे यदि यूएई के क्षेत्र से अबू मूसा और ग्रेटर तुन्ब द्वीपों पर आक्रामकता दोहराई जाती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता के खिलाफ किसी भी “लॉन्चिंग पॉइंट” को निशाना बनाएगा, और ऐसी कार्रवाई पहले घोषित की जा चुकी है तथा व्यवहार में साबित भी हो चुकी है। यह चेतावनी हाल के क्षेत्रीय तनाव के बीच आई है, जहां ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष में कई मिसाइल हमले किए हैं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हालिया हमलों में यूएई की भूमिका रही है, खासकर अबू मूसा और खार्ग द्वीपों पर। ज़ुल्फ़िकारी ने यूएई के नागरिकों से अपील की कि वे बंदरगाहों, डॉकों और अमेरिकी ठिकानों से दूर रहें, ताकि किसी संभावित जवाबी कार्रवाई में निर्दोषों को नुकसान न पहुंचे। कुछ रिपोर्टों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रास अल खैमाह के निवासियों के लिए निकासी का नक्शा भी जारी किया है, जिसमें हमले की आशंका जताई गई है। ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने कहा कि विरोधी अब “हताशा” की स्थिति में हैं। वे अपनी जनता को जीत का भरोसा नहीं दिला पा रहे और गलत सूचना का सहारा ले रहे हैं। अज़ीज़ी ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य सहित ईरान द्वारा थोपी गई वास्तविकताओं को अमेरिका बदल नहीं सकता। उन्होंने अमेरिकी अतिरिक्त सैन्य तैनाती और संभावित नौसैनिक नाकाबंदी की रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे कदम रणनीतिक संतुलन नहीं बदलेंगे बल्कि स्थिति बिगाड़ेंगे। ईरान उच्चतम सैन्य तत्परता पर है और “निर्णायक जवाबी कार्रवाई” के लिए तैयार है। हाल के मिसाइल हमले बदला लेने और एकजुट प्रतिरोध मोर्चे को मजबूत करने का हिस्सा हैं। अजीजी ने हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह सहित अन्य नेताओं की मौत के बाद “प्रतिरोध धुरी” के कमजोर होने के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि लेबनान सहित कई क्षेत्रों में मोर्चे की सैन्य क्षमता बढ़ी है। उन्होंने क्षेत्रीय सरकारों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल न होने दें और अमेरिकी सेनाओं की वापसी की मांग की। ईरान का मानना है कि विदेशी सैन्य उपस्थिति समाप्त होना ही संकट से निकलने का रास्ता है।
