पश्चिम एशिया सैन्य संघर्ष : ट्रंप का यूरोपीय देशों को कड़ा संदेश- नाटो ने ‘होर्मुज’ की सुरक्षा नहीं की तो भविष्य बहुत बुरा होगा, जापान अभी तटस्थ

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Eksandeshlive desk

वाशिंगटन/टोक्यो/लंदन : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) देश होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं करते तो उनका भविष्य बहुत बुरा होगा। ट्रंप ने इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर यूरोपीय देशों को एक कड़ा संदेश दिया। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को रविवार को फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, “यह बिल्कुल सही है कि जो लोग इस जलडमरूमध्य से फायदा उठाते हैं, वे यह सुनिश्चित करने में मदद करें कि वहां कुछ भी बुरा न हो।” उन्होंने कहा, “अगर कोई जवाब नहीं आता है तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा।” राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को अमेरिका से दी गई मदद का जिक्र करते हुए कहा, “हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद करने की कोई जरूरत नहीं थी। अब हम देखेंगे कि क्या वे हमारी मदद करते हैं। मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं कि हम उनके लिए हमेशा मौजूद रहेंगे। यह पूछे जाने पर कि उन्हें नाटो से किस तरह की मदद चाहिए? राष्ट्रपति ने कहा, “जो भी जरूरी हो। उसमें बारूदी सुरंग नष्ट करने वाले जहाज भी शामिल हो सकते हैं।”

नाटो यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी रक्षा गठबंधन है : नाटो का शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने और अपने सदस्य देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसका मकसद किसी ऐसे देश की मदद करना नहीं है, जब कोई सदस्य देश खुद ही युद्ध शुरू कर दे। फ्लोरिडा से एयर फ़ोर्स वन विमान से व्हाइट हाउस लौटते समय ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया, “हम हमेशा नाटो के साथ खड़े हैं।” उन्होंने कहा, “यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश एक बहुत ही छोटे से काम में हमारी मदद नहीं करता। राष्ट्रपति ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के प्रति अपनी नाराजगी एक बार फिर जहिर की। उनकी नाराजगी का कारण यह था रहा स्टारमर ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों को तुरंत अपना समर्थन नहीं दिया था। उन्होंने कहा, “ब्रिटेन को शायद हमारा सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है। जब मैंने उनसे मदद मांगी तो वह साथ नहीं आए।” इस मसले पर जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि जापान की अभी होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद के लिए जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। यह बात प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कही। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से मदद का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने टोक्यो से सीधा कोई अनुरोध नहीं किया है। बावजूद इसके उनकी सरकार जरूरी कदम उठाने के तरीकों पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि ताकाइची और ट्रंप गुरुवार को वाशिंगटन में मिलने वाले हैं। वर्तमान में नाटो में कुल 32 सदस्य देश हैं। इस सैन्य गठबंधन का सबसे नया सदस्य स्वीडन है। संस्थापक सदस्य बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।

अमेरिका ने ‘होर्मुज’ संकट पर ब्रिटेन से बात की : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर से होर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति पर बात की। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता के अनुसार, स्टार्मर और ट्रंप ने रविवार को इस वैश्विक संकट पर बातचीत के दौरान गंभीर चिंता जताई। एबीसी न्यूज के अनुसार, प्रवक्ता ने कहा, “दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में चल रही स्थिति और तेल के आवागमन में आ रही रुकावट को खत्म करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के महत्व पर चर्चा की। इस रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल की कीमत बढ़ रही है।” प्रवक्ता के अनुसार, “प्रधानमंत्री स्टार्मर ने उन अमेरिकी सैनिकों के प्रति भी अपनी संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने इस संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई है।” प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेता एक-दूसरे के संपर्क में रहने पर सहमत हुए। इसके फौरन बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से बात की और मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को ब्रिटेन समेत अन्य देशों से अपील की कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में गहराते संकट को सुलझाने में आगे आकर मदद करें।

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