Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : लोकसभा और राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पश्चिम एशिया संकट पर दिए गए वक्तव्य की विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोविड जैसी स्थिति आने की बात कही, लेकिन कोविड काल में सरकार की नीतियों और उससे हुई जनहानि को पूरी तरह नज़रअंदाज कर दिया। राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति अब प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत नीति बन गई है और इसका परिणाम पूरी दुनिया में मजाक का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते और हालिया भाषण से यह स्पष्ट है कि भारत की विदेश नीति में कोई ठोस स्थिति नहीं है, जिससे देश को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि एलपीजी, पेट्रोल और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में संकट उत्पन्न होगा और देश एक नई चुनौती का सामना करेगा। सरकार ने संरचनात्मक गलती की है और पूरे ढांचे को कमजोर कर दिया है, जिसे सुधारने में लंबा समय लगेगा। मौजूदा सरकार इस स्थिति को संभालने में सक्षम नहीं है।
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के असर होगी बात : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक संसदीय सौंध (पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी) में होगी। बैठक में सभी दलों के सदन के नेताओं को आमंत्रित किया जाता है। इस बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के भारत पर पड़ने वाले असर पर बात होगी। साथ ही घरेलू गैस (एलपीजी) की आपूर्ति और अस्थिर बाजार स्थितियों पर भी सरकार विपक्ष के साथ चर्चा करेगी। हांलाकि सरकार की मुखर आलोचना करने वाले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बैठक में सम्मिलित होने की उम्मीत कम ही है। राहुल गांधी ने स्वयं मीडिया से बातचीत में कहा है कि वे पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार केरल जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। मंगलवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संघर्ष से निपटने के सरकार के तरीके पर निशाना साधा। राज्यसभा में सांसद जॉन ब्रिटास ने 2003 के उस संसदीय प्रस्ताव का हवाला दिया जिसमें इराक युद्ध की निंदा की गई थी, और सरकार से ईरान के मामले में भी इसी तरह का रुख अपनाने की अपील की। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संघर्ष के व्यापक प्रभावों पर बात की। उन्होंने सभी राज्यों से केंद्र के साथ मिलकर काम करने की बात की। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में यह जरूरी है कि संसद का उच्च सदन शांति और संवाद का एकजुट संदेश दे। इससे पहले लोकसभा में सोमवार को प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए सरकार के उपायों की जानकारी दी थी।
