Sunil Verma
रांची : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित 6 दशक प्राचीन पशुपतिनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद आयोजित प्राणप्रतिष्ठाअनुष्ठान का समापन बुधवार को होगा। मंगलवार को अपराह्न में देव विग्रहों का नगर परिभ्रमण हुआ। सुसज्जित वाहन पर सवार नर्मदेश्वर शिवलिंग , माता पार्वती, विघ्नहर्ता भगवान गणेश, कार्तिकेय एवं दुर्गा माता के विग्रहों को कांके ब्लॉक चौक एवं अरसंडे स्थित विभिन्न मंदिरों का दर्शन कराते हुए बोड़ेया स्थित रांची जिले के सबसे प्राचीन मदन मोहन मंदिर ले जाया गया एवं वापसी पर यज्ञ मण्डप में हवन एवं आरती हुई। रात्रि में शिव विवाह के पश्चात सभी देवों को शय्याधिवास कराया गया। इसके पूर्व जलाधिवास, पुष्पाधिवास, फलाधिवास एवं अन्नाधिवास का अनुष्ठान संपन्न हुआ। वेदी पूजन एवं 108 कलश से देव विग्रहों का स्नपन हुआ। मंदिर में आज 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन प्रारंभ हुआ जो बुधवार को सुबह 9:00 बजे तक चलेगा। प्रतिदिन शाम में विभिन्न कीर्तन एवं संगीत मंडलियों द्वारा भजन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम संयोजक पंकज वत्सल ने बताया कि बुधवार को देवस्थापन, हवन एवं कन्या पूजन के पश्चात भंडारा तथा श्रुति देशमुख एवं टीम द्वारा भजन का आयोजन है। इस अवसर पर मंदिर के विभिन्न चरणों के निर्माण में योगदान देने वाले शिल्पकारों एवं मजदूरों का सम्मान भी किया जाएगा। अनुष्ठान में यजमान के रूप में पांच जोड़ी भाग ले रही है, जिनमें डॉ दयानंद तुरी एवं डॉ नरगिस कुमारी, डॉ सरोज कुमार ठाकुर एवं डॉ नंदनी कुमारी, प्रभात कुमार एवं रेणु देवी, रामप्रीत सिंह एवं शांति सिंह तथा विजय रामानंदी एवं गीता कुमारी शामिल हैं। समस्त वैदिक अनुष्ठान पशुपतिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सुनील कुमार पांडेय के नेतृत्व में सात सदस्य ऋत्विक मंडली द्वारा संपन्न किए जा रहे हैं। ॠत्विकों में आचार्य विमलेश द्विवेदी एवं आचार्य अतुल तिवारी (प्रयागराज), आचार्य अभिषेक पांडेय (वाराणसी), पंडित सुशील पांडेय (आरा), आशीष त्रिपाठी शास्त्री (मोतिहारी) तथा पंडित मृत्युंजय तिवारी (औरंगाबाद) शामिल हैं। मंदिर में 61 फीट ऊंचे गुंबद के अलावा लगभग 2000 वर्गफीट के सभागार तथा 1000 वर्गफीट के गर्भ गृह एवं परिक्रमा का निर्माण किया गया है। गुंबद में भी तीन स्तरों पर देवी देवताओं एवं महापुरुषों की 18 मूर्तियां लगाई गई हैं। विशाल मंदिर लोगों के आकर्षण एवं श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
