तसवीर गुरुदेव की आखिरी खींची गई तस्वीर है। बांगला संस्कृति के हिसाब से आज उनका जन्मदिन है।

रवींद्रनाथ टैगोर ने पत्नी से कहा स्कूल खोलना है, और पत्नी हंसने लगी, जानिए पूरा वाकया

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कहते हैं कि रवींद्रनाथ ने जब पहली बार अपनी पत्नी से कहा कि वह एक स्कूल खोलना चाहते हैं, तो मृणालिनी देवी की हंसी नहीं रूकी. अगर दुनिया के सफलतम ड्रॉपआउट्स की लिस्ट बने तो रवींद्रनाथ उसमें से एक होंगे. स्कूल की पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था. प्रेसीडेंसी कॉलेज में उनकी पढ़ाई की अवधि महज़ एक दिन थी.

लंदन बैरेस्टरी पढ़ने भेजा गया, तो नाटक की पांडुलिपि के साथ वापस आ गए. दूसरी बार फिर भेजा गया, तो बीच रास्ते में जहाज़ से उतरकर चंद्रनगर चले गए.

घर वालों ने मान लिया की लड़का बाकी भाइयों जितना विद्वान नहीं निकलेगा. ऐसे में रवींद्रनाथ का सबकुछ दांव पर लगाकर स्कूल खोलना किसी अजूबे से कम नहीं था, लेकिन रवींद्रनाथ महज़ एक स्कूल नहीं खोलना चाहते थे, उनके लिए शांति निकेतन वह व्यवस्था थी जिसमें रटने वाली प्रवत्ति और बंद दीवारों के बीच ज्ञान बांटने से अलग शिक्षा व्यवस्था थी. गुरुदेव का मानना था कि भारत के लिए शिक्षा का पाश्चात्य तरीका सही नहीं था. उन्होंने एक योजना बनाई और उसे सफ़लतापूर्वक पूरा किया.

हालांकि, शांति निकेतन ने उन्हें निजी जीवन में असीम दुख दिया. शायद सोने को निखरने के लिए भट्टी में तपना ही पड़ता है, लेकिन शांति निकेतन की सफ़लता को उसके छात्रों के ज़रिए समझा जा सकता है. शांति निकेतन के सफल छात्रों की सूची बड़ी लंबी है. इनमें से कुछ नामों में ऑस्कर विजेता फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे हैं.

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हैं. गौरापंत शिवानी, महाश्वेता देवी, हफ़िंग्टन पोस्ट की संस्थापक एरियाना हफ़िंग्टन है. रामकिंकर बैज, केजी सुब्रमण्यम, मृणालिनी साराभाई हैं, महारानी गायत्री देवी हैं, इनके अलावा हज़ारी प्रसाद द्विवेदी, नंदलाल बोस, अमिय चक्रवर्ती, बाबू बनारसी दास चतुर्वेदी और बलराज साहनी जैसे शिक्षकों की लंबी लिस्ट है. इन सबके अलावा शांति निकेतन वो जगह थी, जिसने साहित्य की दुनिया का परिचय कबीर के साथ करवाया.

नोट : अनिमेष मुखर्जी के फेसबुक से साभार.   

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