राजकोष कंगाल, सिस्टम बेहाल; कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर सवाल : प्रतुल शाह देव

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News by Sunil verma
रांची। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता Pratul Shah Deo ने राज्य सरकार पर गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि झारखंड में वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है।
प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि पिछले 26 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी महीने की 11 तारीख तक भी सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। उनके अनुसार राज्य में लगभग 2,35,930 नियमित अधिकारी-कर्मचारी हैं, जबकि 40 से 45 हजार संविदा और आउटसोर्स कर्मी भी हैं। इस तरह कुल करीब 2.75 लाख कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला, जिससे लगभग 15 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वेतन नहीं मिलने से कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लोगों को राशन, बच्चों की फीस और बैंक ईएमआई जैसी जरूरतें पूरी करने में कठिनाई हो रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि क्या **Hemant Soren सरकार हिमाचल प्रदेश की तरह वेतन देने के लिए कर्ज लेने की स्थिति में पहुंच गई है या किसी अग्रिम राशि का इंतजार कर रही है।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि आमतौर पर नए वित्तीय वर्ष में बजट को स्वीकृति मिलने के बाद 5 अप्रैल तक वेतन का भुगतान हो जाता था, लेकिन इस बार वित्तीय कुप्रबंधन के कारण स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च तक सरकार 22,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटन खर्च नहीं कर पाई, क्योंकि राजस्व की स्थिति कमजोर थी।
उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च को केंद्र सरकार की ओर से राज्य को ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए लगभग 2300 करोड़ रुपये तथा नगर विकास के लिए 392 करोड़ रुपये दिए गए, इसके बावजूद राज्य का खजाना खाली बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री आवास पर भी उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने मुख्यमंत्री आवास के निर्माण के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जबकि कर्मचारियों के वेतन के लिए पैसे नहीं हैं। उनके अनुसार भवन की मूल लागत लगभग 67 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जबकि इंटीरियर और अन्य सुविधाओं का खर्च अलग है।
उन्होंने कहा कि सरकार को प्राथमिकता तय करनी चाहिए और सबसे पहले कर्मचारियों का वेतन सुनिश्चित करना चाहिए।

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