रांची: झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार को हटिया मजदूर यूनियन (सीटू) की ओर से एचईसी मुख्यालय के समक्ष केंद्र सरकार की नई श्रम संहिताओं के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए सरकार का पुतला दहन किया और श्रम कानून वापस लेने की मांग उठाई। धरना–प्रदर्शन का नेतृत्व यूनियन के अध्यक्ष भवन सिंह ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों को समाप्त करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व भारतीय मजदूर संघ इन्हें सुधार बता रहे हैं, जबकि हकीकत में ये कॉरपोरेट और ठेकेदार व्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम हैं। भवन सिंह ने कहा कि नई संहिता से पूर्व लागू न्यूनतम मजदूरी, बोनस, ग्रेच्युटी, समान वेतन और वेतन भुगतान कानून कमजोर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 50 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर अधिकांश प्रावधान लागू नहीं होंगे और मालिक अपनी मनमानी कर सकेंगे। वहीं 300 कर्मचारी वाले संस्थान बिना सरकारी अनुमति के छंटनी, तालाबंदी और लॉकआउट कर सकेंगे, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि फिक्स्ड टर्म रोजगार व्यवस्था के लागू होने से स्थायी नौकरियां खत्म हो जाएंगी और 11 महीने के अनुबंध के कारण मजदूरों को ग्रेच्युटी से वंचित होना पड़ेगा। हड़ताल करने या दूसरों को प्रेरित करने पर कठोर सजा का प्रावधान भी किया गया है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर, यूनियन पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मजदूर अधिकारों की रक्षा और श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की।
