रेल कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी उग्र आंदोलन को देगी जन्म : शिव गोपाल मिश्र

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के आह्वान पर विभिन्न लंबित एवं न्यायसंगत मांगों के शीघ्र समाधान की मांग को लेकर सोमवार को पूरे भारतीय रेल में ‘अखिल भारतीय मांग दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर रेलवे की सभी शाखाओं में धरना-प्रदर्शन, रैलियां और सभाएं आयोजित की गईं। रेल कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में रनिंग स्टाफ के लिए किलोमीटर भत्ता (केएमए) दरों में वृद्धि, लेवल-1 के 30 प्रतिशत पदों को लेवल-2 में उन्नयन, लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरना, बढ़ते रेल नेटवर्क को देखते हुए अतिरिक्त पदों का सृजन, लेवल-8 व 9 में कार्यरत अराजपत्रित कर्मचारियों को नाइट ड्यूटी भत्ता, जोखिम व कठिनाई भत्तों में वृद्धि, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से लागू करना, कर्मचारियों के माता-पिता को पास/पीटीओ व चिकित्सा सुविधा में शामिल करना, प्वाइंट्समैन श्रेणी के लिए चार-ग्रेड वेतन संरचना तथा ट्रैक मेंटेनरों की पेट्रोलिंग सीमा 12 किलोमीटर तय करने जैसी मांगें शामिल रहीं।

दिल्ली में एआईआरएफ की सहयोगी इकाई नॉर्दर्न रेलवेमेंस यूनियन (एनआरएमयू) ने दोपहर बाद बड़ौदा हाउस स्थित उत्तर रेलवे मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए एआईआरएफ के महासचिव शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि यदि सरकार ने रेलवे कर्मचारियों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया, तो संगठन को और तीव्र संघर्ष का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कठिन कार्य परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों का तत्काल निपटारा किया जाना चाहिए। एनआरएमयू के केंद्रीय अध्यक्ष एसके त्यागी और मुख्यालय मंडल के सचिव संजीव सैनी ने भी संबोधित किया। दिल्ली मंडल की ओर से गाजियाबाद, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (प्लेटफॉर्म संख्या-1) तथा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी विरोध प्रदर्शन किए गए, जिनमें मंडल सचिव अनूप शर्मा सहित अन्य नेताओं ने भाग लिया। एआईआरएफ के बैनर तले बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारियों ने भाग लेते हुए संघर्ष को और तेज करने की घोषणा की।

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