रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने सरायकेला में एमएसएमई डिफेंस कॉन्क्लेव–2026 का किया शुभारंभ

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Eksandeshlive Desk

सरायकेला : आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने और झारखंड के लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्योगों (एमएसएमई) को रक्षा उत्पादन से जोड़ने की दिशा में शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में ‘एमएसएमई डिफेंस कॉन्क्लेव–2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने दीप प्रज्वलित कर किया। यह झारखंड में अपनी तरह का पहला डिफेंस कॉन्क्लेव है, जिसका उद्देश्य उद्योग, रक्षा क्षेत्र और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि झारखंड खनिज संसाधनों, मजबूत औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन से समृद्ध राज्य है। ऐसे में यहां डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में डिफेंस कॉरिडोर सफलतापूर्वक विकसित हुए हैं, वहां राज्य सरकार की इच्छाशक्ति और केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय निर्णायक साबित हुआ है। यदि झारखंड सरकार केंद्र के साथ मिलकर आगे बढ़े, तो राज्य रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

संजय सेठ ने रांची में आयोजित एस्टेक कार्यक्रम और अन्य रक्षा संबंधी आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आयोजनों में बड़ी संख्या में स्टॉल और उद्योगों की भागीदारी झारखंड की औद्योगिक क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिफेंस कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री को आमंत्रित करना किसी प्रकार का राजनीतिक संकेत नहीं, बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास के लिए साझा प्रयास का प्रतीक है। रक्षा उत्पादन में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कई दशकों तक भारत रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर रहा, लेकिन बीते कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। आज भारत 92 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। सरकार ने रक्षा उत्पादन के लिए तीन लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि चालू वित्त वर्ष में रक्षा बजट लगभग दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस बजट का सबसे बड़ा लाभ एमएसएमई और स्टार्टअप सेक्टर को मिल सकता है। एमएसएमई और स्टार्टअप की भूमिका पर जोर देते हुए संजय सेठ ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है। देश में करीब चार करोड़ एमएसएमई हैं, जो लगभग 14 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 16 हजार एमएसएमई ही सीधे तौर पर डिफेंस सेक्टर से जुड़े हैं। इस संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है, जो देश की नवाचार क्षमता को दर्शाता है। रक्षा राज्य मंत्री ने आदित्यपुर को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की अपील करते हुए कहा कि यहां मौजूद ऑटोमोबाइल और रेलवे सेक्टर से जुड़े उद्योग रक्षा क्षेत्र में भी आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के अन्य हिस्सों में छोटे उद्यमियों ने ड्रोन और आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

इस अवसर पर आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एसिया) के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल ने कहा कि आदित्यपुर की पहचान अब केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में यहां रक्षा उत्पादों का भी निर्माण होगा। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष मानव केडिया ने आदित्यपुर–जमशेदपुर क्षेत्र में एक समर्पित डिफेंस केंद्र स्थापित करने की मांग रखी। जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन ने बताया कि लगभग 5000 एकड़ में फैले आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में करीब 1500 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। ये इकाइयां देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कॉन्क्लेव में डीआरडीओ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, महिंद्रा डिफेंस सहित कई प्रमुख रक्षा संस्थानों की भागीदारी रही। कुल 62 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां रक्षा उत्पादन से जुड़ी तकनीकों और अवसरों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके अलावा सेमिनार, बी2बी मीटिंग और पैनल चर्चाओं के माध्यम से उद्योगपतियों को ऑटोमोबाइल और रेलवे सेक्टर से डिफेंस सेक्टर में प्रवेश की प्रक्रिया और संभावनाओं की जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम में पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा, भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष नरेश पचीसिया, एसिया महासचिव प्रवीण गुटगुटिया, लघु उद्योग भारती के सरायकेला जिला अध्यक्ष विनोद शर्मा सहित अनेक उद्योग प्रतिनिधि, रक्षा विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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