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मेसरा (रांची): जहाँ इरादे नेक हों और दिलों में मोहब्बत, वहाँ हर त्योहार भाईचारे का उत्सव बन जाता है। बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र में इस बार कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। एक तरफ माहे रमजान का 14वां रोजा और उसकी पाकीजगी थी, तो दूसरी तरफ होली के रंगों का हुड़दंग। इन दो अलग-अलग रंगों के बीच मेसरा की जनता ने एकता और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का ऐसा ताना-बाना बुना कि वह पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन गया। संयम और उत्साह का अद्भुत संगम, होली की पिचकारियां चलीं और अबीर के गुलाल भी उड़े, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखा गया कि इबादत में कोई खलल न पड़े। इस दौरान थाना प्रभारी अजय कुमार दास की मुस्तैदी ने शांति का एक सुरक्षा कवच तैयार किया, जिससे परिंदा भी पर न मार सका। चेहरे पर मुस्कान और कुरते पर अबीर लिए स्थानीय लोगों ने यह संदेश दिया कि मानवता का रंग हर रंग से गहरा होता है। सांप्रदायिक सौहार्द के सजग प्रहरी, इस खास मौके पर केदल अंजुमन के सदर समीम आलम, सिरतनगर नेवरी के सदर जाकिर अंसारी और चुट्टू अंजूमन के सेक्रेट्री हाजी हेयात अंसारी ने रमजान के पवित्र महीने के बीच होली की मिठास घोली। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि त्योहार अलग हो सकते हैं, पर दिल तो एक ही धड़कन पर धड़कते हैं। वहीं समाजिक एवं शिक्षा जगत के स्तंभ मनरखन महतो, जिला परिषद सदस्य संजय कुमार महतो, बीआईटी मोड़ दुर्गा मंदिर के पुजारी आचार्य धनंजय मिश्रा, नेवरी मुखिया साधो उरांव और केदल मुखिया राहूल मुंडा ने एक-दूसरे को अबीर का टीका लगाकर समाज को एकता का गहना पहनाया। वक्ताओं ने कहा कि मेसरा की मिट्टी पर आज तक सियासत नहीं, बल्कि मोहब्बत की फसल उगी है। जनप्रतिनिधियों के आपसी तालमेल ने इस उत्सव को यादगार बना दिया। एक ओर जहाँ खाकी का पहरा चाक-चौबंद रहा, वहीं दूसरी ओर समाज के प्रबुद्ध जनों ने इंसानियत के रंग में रंगकर यह साबित कर दिया कि आपसी प्रेम-भाईचारा और विश्वास ही विकास की असली सीढ़ी है।
