Eksandeshlive Desk
रांची : हजारीबाग जिले के उपायुक्त (डीसी) रहते हुए सेवायत भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री में शामिल होने के आरोप में जेल में बंद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी विनय चौबे को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और विनय चौबे की ओर से पेश दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए विनय चौबे को जमानत देने से इनकार कर दिया।
यह मामला अगस्त माह में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। एसीबी ने इस संबंध में कांड संख्या 9/2025 दर्ज की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि विनय चौबे ने हजारीबाग के उपायुक्त पद पर रहते हुए सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में भूमिका निभाई।इससे पहले 16 सितंबर को हजारीबाग स्थित एसीबी की विशेष अदालत ने भी विनय चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इस मामले में एसीबी की ओर से चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुमित गड़ोदिया ने पक्ष रखा, जबकि विनय चौबे की ओर से वरीय अधिवक्ता आर.एस. मजूमदार ने जमानत के समर्थन में दलीलें दीं। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद विनय चौबे को फिलहाल जेल में ही रहना होगा, जबकि सेवायत भूमि से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
