Eksandeshlive Desk
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1855 में स्वतंत्रता की लड़ाई के अग्रगण्य, वीर सपूत और हूल आंदोलन के मुखिया सिद्धो-कान्हू और चांद-भैरव को माल्यार्पण अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि संथाल हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और हजारों वीर शहीदों के संघर्ष और समर्पण के पदचिन्हों पर चलने वाले दिशोम गुरुजी (शिबू सोरेन) अभी अस्वस्थ हैं। इस कारण मैं इस बार भोगनाडीह की क्रांतिकारी, वीर भूमि पर नहीं आ पाया। लेकिन हूल दिवस हमारे लिए सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। हूल दिवस हमारे लिए संकल्प का दिन है, हूल हमारी ताकत है, हूल हमारी पहचान है। आने वाले समय में आदिवासी धर्म कोड, आदिवासी संस्कृति, भाषा, सभ्यता और पहचान के लिए हूल उलगुलान होगा। इस अवसर पर गांडेय विधायक कल्पना सोरेन,विधायक रामगढ़ ममता देवी, विधायक टुंडी मथुरा प्रसाद महतो, विधायक सारठ उदय प्रताप सिंह उर्फ चुन्ना सिंह, विधायक खिजरी राजेश कच्छप और पूर्व विधायक केएन त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।
हूल दिवस पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सिद्धो–कान्हो को दी श्रद्धांजलि : हूल दिवस के अवसर पर सोमवार को रांची स्थित सिद्धो–कान्हो पार्क में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मजदूर, कर्मचारी, किसानों के प्रतिनिधि, छात्र–युवा कार्यकर्ता शामिल सहित अन्य शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत 1855 के हूल विद्रोह के महान योद्धाओं सिद्धो–कान्हो और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। मौके पर वक्ताओं ने हूल विद्रोह को साम्राज्यवाद विरोधी, जमींदारी विरोधी, कंपनी राज विरोधी पहला सशस्त्र जनविद्रोह बताते हुए कहा कि आज फिर से सत्ता और पूंजी के गठजोड़ के खिलाफ, श्रमिकों और किसानों को उसी आत्मबल और एकता की जरूरत है। इसके बाद मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं की प्रतीकात्मक प्रतिलिपि को आग के हवाले किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह श्रम संहिताएं मज़दूरों को उनके ऐतिहासिक अधिकारों से वंचित कर, पूंजीपतियों के मुनाफे को संरक्षण देती हैं। यह नई औपनिवेशिक गुलामी थोपने का प्रयास है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह केवल कानून का दहन नहीं, बल्कि एक व्यापक आन्दोलन की चेतावनी है। यह संघर्ष हूल विद्रोह की विरासत को आगे ले जाने का प्रयास है। कार्यक्रम में नौ जुलाई को प्रस्तावित देशव्यापी मजदूर हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम को एक्टू के शुभेंदु सेन, मोहन दत्ता, सीटू के अनिर्बान बोस, प्रतीक मिश्रा, एटक के सच्चिदानंद मिश्रा, किसान सभा के सुखनाथ लोहरा, बीरेंद्र कुमार, बेफी के केआर चौधरी ने संबोधित किया।
