Eksandeshlive Desk
रांची : बाल विवाह अपराध हैं। इसके खिलाफ अब लोग जागरूक हो रहे हैं। समाज में एकजुटता आई है। बाल विवाह के खिलाफ धार्मिक संगठन भी आगे आ रहे हैं। वहीं एक सर्वे के मुताबिक भारत में बाल विवाह में 69प्रतिशत की कमी आई है। वहीं झारखंड के रांची में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय ने जिला प्रशासन, पंचायतों और सामुदायिक सदस्यों के साथ बेहद करीबी समन्वय से काम करते हुए पिछले तीन वर्षों में जिले में 1,053 बाल विवाह रुकवाए हैं। इस रिपोर्ट को जेआरसी के सहयोगी संगठन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहैवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) ने तैयार किया है। बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। यह बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए देश के 451 जिलों में काम कर रहा है।
2024 में शुरू हुआ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान : इस रिपोर्ट के नतीजों से उत्साहित सिंदुआर टोला ग्रामोदय विकास विद्यालय के सचिव राजेन कुमार ने कहा, “बाल विवाह के खात्मे के लिए अपने जिले में हम अग्रिम मोर्चे पर हैं और सरकार, प्रशासन व समुदायों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा हर कदम उस भविष्य की ओर ले जाता है जहां हर बच्चे को पढ़ने की सुविधा मिले और वह बड़ा होकर वो बने जो वो बनना चाहता है। यह रिपोर्ट इस बात पर मुहर लगाती है कि शिक्षा, जागरूकता व कानूनी हस्तक्षेप 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए सबसे कारगर औजार हैं।” सर्वे में हिस्सा लेने वाले 99 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने मुख्यत: गैरसरकारी संगठनों के जागरूकता अभियानों, स्कूलों व पंचायतों के जरिए भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के बारे में सुना या जाना है। रिपोर्ट इस तथ्य को उजागर करती है कि 2024 में शुरू हुए भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में गैरसरकारी संगठनों की सबसे अहम भूमिका रही है।
