समाज में लड़कियों की विवाह आत्मनिर्भर होने के बाद हो: अभियान निदेशक

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News by Sunil

रांची: राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत यूनिसेफ के सहयोग से आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ के प्रागंण में उमंग दिवस का औपचारिक शुभारंभ अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा व उपस्थित किशोर-किशोरियों द्वारा आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों 10-19 वर्ष के लिए एक मासिक सहभागिता मंच है, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी, परामर्श तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। यह मंच किशोरों को सकारात्मक स्वास्थ्य व्यवहार अपनाने, सही निर्णय लेने, सहकर्मी नेतृत्व विकसित करने तथा परिवार और समुदाय में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाता है। मौके पर श्री झा ने कहा कि किशोरियों की शादी 18 वर्ष तथा किशोरों की शादी 21 वर्ष की आयु के बाद ही होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जैसे समाज में यह धारणा है कि जब लड़का कमाने लगेगा तभी उसकी शादी होगी, उसी प्रकार यह सोच लड़कियों के लिए भी लागू होनी चाहिए। किशोर स्वास्थ्य जागरूकता, परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की सराहनीय है। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने घर में बड़ों को देखकर सीखते हैं और उसी से प्रेरित होकर आगे बढ़ते हैं। किशोरावस्था वह समय है जब बच्चों में जिज्ञासा सबसे अधिक होती है और वे स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न पूछते हैं। जो बच्चे अपनी जिज्ञासाओं और प्रश्नों के साथ आगे बढ़ते हैं, वही आगे चलकर जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनते हैं। जब लड़कियां पढ़ेंगी, काम करेंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी वे सशक्त बनकर अपना जीवन बेहतर ढंग से जी सकेंगी। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना और असंतुलित खान-पान जैसी आदतें कई बीमारियों का कारण बनती हैं, जिनसे हमें बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उमंग दिवस किशोरों को ऐसा मंच प्रदान करता है जहां वे उन विषयों पर भी खुलकर चर्चा कर सकते हैं जिनके बारे में वे अपने माता-पिता से बात करने में संकोच करते हैं।रफत फरजाना, राज्य समन्वयक ने उमंग दिवस के उद्देश्यों को साझा करते हुए बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरियों में गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर संवाद के लिए एक सुरक्षित मंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से किशोरों में निवारक स्वास्थ्य व्यवहारों जैसे स्वच्छता, संतुलित पोषण, शारीरिक गतिविधि तथा नशे के दुरुपयोग की रोकथाम को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही आवश्यकतानुसार परामर्श और रेफरल सेवाओं के माध्यम से उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा।डॉ कनिनिका मित्रा, चीफ फील्ड आॅफिसर यूनिसेफ झारखंड ने कहा कि उमंग दिवस के माध्यम से बच्चों को एक ऐसा मंच मिलेगा जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकेंगे और अपनी समस्याओं को साझा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि किशोर-किशोरी कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, जिन्हें संवेदनशीलता और समझदारी के साथ मार्गदर्शन देने की आवश्यकता होती है। उनके साथ कभी भी आलोचनात्मक या निर्णायक व्यवहार नहीं करना चाहिए। यूनिसेफ से प्रीति श्रीवास्तव ने बच्चों के साथ बाल विवाह की रोकथाम और उसके दुष्प्रभावों पर क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से जानकारी साझा की।

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