
Ranchi : सरकार हमारी और भाजपा की नीती नहीं चलेग: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं से उर्दू,मगही, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाओं को हटाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और सवाल खड़े करने वाला फैसला है।
पूर्व मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता मिथिलेश ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की थी। इतना ही नहीं, विभिन्न दलों के कई नेताओं ने भी इन भाषाओं को शामिल करने की मांग की थी।
फिर सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी कौन सी ताकत है, जिसके दबाव में आकर इन क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर किया गया? क्या यह निर्णय सच में जनभावनाओं के अनुरूप है या फिर कुछ अधिकारियों के भाजपा माइंडसेट का नतीजा?
यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि सरकार भले हमारी हो, लेकिन कई अधिकारी अब भी पुराने राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं। यह स्थिति लोकतंत्र और जनभावना—दोनों के खिलाफ है।
हमारी मांग स्पष्ट है:
👉 क्षेत्रीय भाषाओं—मगही, भोजपुरी, अंगिका और उर्दू को तुरंत पुनः शामिल किया जाए
👉 इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी हो
👉 जरूरत पड़े तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट तक लड़े, ताकि जनता का विश्वास बना रहे
झारखंड की सरकार तभी सशक्त मानी जाएगी, जब हर भाषा, हर समाज और हर वर्ग को समान सम्मान मिलेगा। यह सरकार “हम सबकी सरकार” (अबुआ सरकार) है और इसे साबित भी करना होगा।
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