सत्तारूढ़ दल नेपाली कांग्रेस की मांग- सोशल मीडिया प्लेटफार्म बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार

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Eksandeshlive Desk

काठमांडू : नेपाली कांग्रेस (एनसी) ने कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगाने के हालिया फैसले पर सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की है। इस संबंध में पार्टी के शीर्ष नेता जल्द ही प्रधानमंत्री ओली से बातचीत करेंगे। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के आवास पर रविवार को हुई पार्टी की कार्य संपादन समिति की बैठक में फैसला लिया गया कि इस मुद्दे पर सरकार से बातचीत की जाए। पार्टी के संयुक्त महासचिव डीना उपाध्याय के अनुसार कई नेताओं ने सरकार के इस कदम पर असंतोष व्यक्त किया।

सोशल मीडिया का नियमन आवश्यक है, लेकिन पूर्ण रूप से बंद करना सही नहीं : उपाध्याय ने कहा कि सोशल मीडिया का नियमन आवश्यक है, लेकिन पूर्ण रूप से बंद करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही पार्टी के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करने वाले हैं। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन नरसिंह केसी ने कहा कि सोशल मीडिया बंद करने के फैसले ने व्यापक रूप से जनता के असंतोष को जन्म दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सरकार इस तरह के एकतरफा और विवादास्पद निर्णय लेती है, तो नेपाली कांग्रेस को हस्तक्षेप करना चाहिए। केसी ने इस कदम को अनुचित और अलोकतांत्रिक बताते हुए बिना पूर्व परामर्श के संसद में विचाराधीन मुद्दे पर सरकार के इस कदम के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन की भी आलोचना की।

नेपाल में सोशल मीडिया साइट्स बंद करने के विरोध में संसद भवन के सामने 8 सितंबर से विरोध-प्रदर्शन : नेपाल में फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, वाट्सएप जैसे 26 सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में युवाओं में नाराजगी है। नई पीढ़ी ने काठमांडू में संसद भवन के सामने 8 सितंबर से विरोध-प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। सरकार के फैसले के विरोध में संसद भवन का घेराव के लिए युवाओं से आगे आने का आह्वान किया गया है। युवाओं ने ‘दि फाइनल रिवोल्यूशन–वीआर पंचिंग’ जैसे स्लोगन के जरिये युवा पीढ़ी से हजारों की संख्या में संसद भवन के सामने उपस्थित होने का आह्वान किया है, जिसे सोशल मीडिया पर काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। टिकटॉक पर हजारों लोगों ने सोमवार को संसद भवन घेराव में शामिल होने के लिए अपनी हामी भर दी है। अभी यह पता नहीं है कि इस आन्दोलन का नेतृत्व कौन करेगा और कमान कौन संभालेगा, लेकिन इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार के फैसले का विरोध करना है।

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