ट्रंप की ईरान के बंदरगाहों की सैन्य घेराबंदी की धमकी पर चीन का सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह, ब्रिटेन भी अमेरिकी कदम के खिलाफ

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Eksandeshlive desk

बीजिंग/लंदन/इस्लामाबाद : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के बंदरगाहों की सैन्य घेराबंदी की धमकी के बाद चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। ब्रिटेन ने कहा है कि वह सैन्य नाकाबंदी के खिलाफ है। वह इसका समर्थन नहीं करेगा। ट्रंप के बयान से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव पैदा हो गया है। इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जल्द ही सऊदी अरब की यात्रा करने वाले हैं। वह सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे। शहबाज शरीफ की यात्रा का मुख्य मकसद ईरान-अमेरिका में सुलह कराने के नए तौर-तरीकों पर चर्चा करना है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित, स्थिर और बाधा मुक्त रखना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हित में है। चीन ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। इस मुद्दे पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि दबाव चाहे जितना भी हो, ब्रिटेन को ईरान युद्ध में नहीं घसीटा जा सकता और वह होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “मेरी राय में, इस जलमार्ग को पूरी तरह से खुला रखना बहुत जरूरी है। इस दिशा में हम कुछ समय से प्रयासरत भी हैं।”

ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों को इस क्षेत्र से दूर रहने की अंतिम चेतावनी दी है : ट्रंप की धमकी के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने अमेरिकी युद्धपोतों को इस क्षेत्र से दूर रहने की अंतिम चेतावनी दी है। भारत के लिए तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से आता है। ईरान हाल ही में भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति देने की घोषणा कर चुका है। उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक तेल पारगमन जलमार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह क्षेत्र अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और नाकेबंदी की धमकी के कारण वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। यह जलमार्ग उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान (मुसंदम प्रायद्वीप) और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है। इसकी लंबाई लगभग 167 किलोमीटर है। सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई मात्र 33-39 किलोमीटर (करीब 21 मील) है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 फीसद और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान, इराक, कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देश अपने तेल निर्यात के लिए मुख्य रूप से इसी जलमार्ग पर निर्भर हैं।

शहबाज अब सऊदी अरब जाएंगे, क्राउन प्रिंस से ईरान-अमेरिका में सुलह पर चर्चा करेंगे : दुनिया न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति होगी। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का भविष्य और क्षेत्रीय तनाव कम करने के उद्देश्य से किए जा रहे व्यापक प्रयास। क्षेत्र में स्थायी संघर्ष विराम और दीर्घकालिक शांति से जुड़े मामले भी शरीफ के एजेंडे का हिस्सा हो सकते हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ संयुक्त राजनयिक प्रयासों की संभावनाओं को तलाशने की भी उम्मीद है। सऊदी अरब का दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री शरीफ के तुर्किये की यात्रा पर जाने की भी उम्मीद है। इस बीच, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सीनेटर मोहम्मद इशाक डार ने तुर्किये के विदेशमंत्री हाकान फिदान और मिस्र के विदेशमंत्री बदर अब्देलाती के साथ अलग-अलग टेलीफोन पर बातचीत की। उन्हें इस्लामाबाद वार्ता से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी है।

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