वीबी-जी-राम-जी कानून गरीबों के खिलाफ, सत्ता को केंद्रीकृत कर रही है माेदी सरकार: राहुल गांधी

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रायबरेली जिले के गांव उमरन में राहुल गांधी ने लगाई मनरेगा चौपाल, कहा-सरकार गरीबों के बजाय नौकरशाहों को प्राथमिकता दे रही

Eksandeshlive Desk

रायबरेली/नई दिल्ली : अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली दाैरे पर आए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार काे मनरेगा के स्थान पर वीबी-जी-राम-जी कानून लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर प्रहार किये। राहुल गांधी ने इस कानून काे गरीबों के खिलाफ बताते हुए कहा कि मोदी सरकार गरीबों के बजाय नौकरशाहों को प्राथमिकता दे रही है और सत्ता को केंद्रीकृत करना चाह रही है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी यहां पत्रकाराें से वार्ता कर रहे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार के विकसित भारत-जी राम जी कानून 2025 (वीबी जी राम जी विधेयक) के विरोध में कांग्रेस देशभर में मनरेगा बचाओ अभियान चला रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा का मकसद बेरोजगार ग्रामीणों को पैसे कमाने का जरिया देना था, लेकिन प्रधानमंत्री ऐसा नहीं चाहते। वे सत्ता को केंद्रीकृत करना चाहते हैं और इसे नौकरशाही को सौंपना चाहते हैं। वह गरीबों को भूखा मरने के लिए छोड़ना चाहते हैं। एक्ट में सुधार के नाम पर गरीबों का सुरक्षा कवच हटाया गया है। उन्होंने एक्ट से महात्मा गांधी के नाम को हटाने की भी निंदा की।

कांग्रेस पूरे देश में मनरेगा को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है : राहुल गांधी के दौरे में सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऊंचाहार के उमरन में आयोजित मनरेगा चौपाल रही। उन्होंने मनरेगा चौपाल को संबोधित करते कहा कि हमारी कांग्रेस की तीन टर्म की सरकार में मनरेगा का जो विचार था, उसमें पंचायतों को जिम्मेदारी देने की बात थी। उनको आर्थिक जिम्मेदारी दी जाए। दूसरा लक्ष्य था कि हिंदुस्तान के गरीब लोगों के लिए तय मजदूरी देय हो ताकि किसी को भी कहीं से भी कम मजदूरी न मिले। प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सत्ता की पूरी ताकत को अपने पास रखना चाहते हैं; वह सत्ता नाैकरशाहों को देना चाहते हैं। यह बड़ी बात नहीं कि मनरेगा का नाम बदला गया है, लेकिन नाम बदल कर गांधीजी का अपमान जरूर किया गया है। उससे बड़ी बात है कि जो गरीब जनता है, उससे संरक्षण हटा दिया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि हमारी कांग्रेस की सरकार की सोच की जड़ को काटा गया है। इसलिए कांग्रेस पूरे देश में मनरेगा को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। जो मजदूरी करते हैं, उनकी सुरक्षा में लगे हुए हैं। नरेन्द्र मोदी चाहते हैं कि देश का पूरा धन अडाणी और अंबानी के पास चला जाए, एक तरफ हम जनता की रक्षा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ मोदी देश की जनता का पैसा खींच कर अडाणी और अंबानी को देने में लगे हैं। इस अवसर सांसद केएल शर्मा, पूर्व विधायक अजयपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इससे पहले सांसद राहुल गांधी ने भएमऊ गेस्ट हाउस में विभिन्न क्षेत्र के प्रतिनिधियों व स्थानीय नेताओं से मुलाकात की व पंचायत चुनावों को लेकर भी गहन चर्चा की। राहुल गांधी ने यहां आईटीआई ग्राउंड पर हो रहे रायबरेली प्रीमियर लीग का उद्घाटन किया। उससे पहले उन्होंने विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने 31 विकास कार्यों का लोकार्पण किया और आठ नए कार्यों का शिलान्यास भी किया व रायबरेली प्रीमियर लीग का उद्घाटन किया।

राहुल गांधी ने ग्रेटर नोएडा हादसे में अभियंता की मौत को बताया जवाबदेही की कमी : कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर अभियंता युवराज मेहता की मौत मामले में कहा कि भारत में नगरों का पतन धन, तकनीक या समाधानों की कमी से नहीं बल्कि जवाबदेही की कमी से है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सड़कें मारती हैं, पुल मारते हैं, आग मारती है, पानी मारता है, प्रदूषण मारता है, भ्रष्टाचार मारता है, उदासीनता मारती है। भारत का शहरी पतन धन, तकनीक या समाधानों की कमी से नहीं है बल्कि यह जवाबदेही की कमी से है। उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी की देर रात घने कोहरे के बीच युवराज मेहता की कार नोएडा सेक्टर-150 स्थित एक खाली भूखंड में गिर गई थी। भूखंड में पानी भरा हुआ था, जिसमें वे कई घंटों तक फंसे रहे। बचाव अभियान के बाद उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह दल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मेरठ क्षेत्र के नेतृत्व में कार्य करेगा। टीम में मंडलायुक्त मेरठ और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता भी शामिल होंगे। एसआईटी को पांच दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित सड़क और क्षेत्र की देखरेख किस विभाग के अधीन थी, जलभराव और गड्ढों की जानकारी होने के बावजूद सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए और किन अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ।

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