Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के मतदान में अब तक का सबसे अधिक क्रमशः 85.38 प्रतिशत और 89.83 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं केरल में 75.01 प्रतिशत हुआ। मतदान प्रक्रिया अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण रही। केरल में भी 78.03 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। इसके साथ ही तीन राज्यों की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव से जुड़ा मतदान संपन्न हुआ। असम, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव के लिए सभी सीटों पर मतदान गुरुवार को संपन्न हो गया। छिटपुट हिंसा को छोड़ दें तो मतदान लगभग शांतिपूर्ण रहा। चुनाव आयोग के शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक असम में 84.42, और पुडुचेरी में 86.92 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार असम और पुडुचेरी में इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ। पिछला उच्चतम असम में 84.67 प्रतिशत (2016 विधानसभा चुनाव) और पुडुचेरी में 86.19 प्रतिशत (2011 विधानसभा चुनाव) रहा था। केरल में कुल 78.03 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। असम, केरल और पुडुचेरी की विधानसभा के लिए मतदान सुबह 07 बजे शुरू हुआ। इसके साथ ही कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी कराए गए। मतदान प्रक्रिया सामान्यतः शांतिपूर्ण रही और केवल कुछ छोटे घटनाक्रम सामने आए। असम में पुरुष मतदान 84.80 प्रतिशत और महिला मतदान 85.96 प्रतिशत रहा। पुडुचेरी में पुरुष मतदान 88.09 प्रतिशत और महिला मतदान 91.33 प्रतिशत दर्ज हुआ। केरल में पूर्व रक्षा मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने तिरुवनंतपुरम में मतदान किया। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्व सरमा ने गुवाहाटी में मां कामाख्या मंदिर में पूजा की। इसके बाद पत्नी के साथ जालुकबाड़ी में मतदान किया। चुनाव को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में वेबकास्टिंग और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी गयी। केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 890 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहे। यहां 2.71 करोड़ मतदाता हैं और चुनावी मुकाबला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बीच त्रिकोणीय बना हुआ है। एलडीएफ जहां लगातार पांचवीं बार सत्ता में लौटने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, वहीं विपक्षी गठबंधन उसे कड़ी चुनौती दे रहे हैं। वहीं उपचुनावों में कर्नाटक के बागलकोट-24 सीट पर 68.70 प्रतिशत और दावणगेरे दक्षिण-107 सीट पर 68.55 प्रतिशत मतदान हुआ। नगालैंड के कोरिडांग-28 में 82.21 प्रतिशत और त्रिपुरा के धर्मनगर-56 में 80.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
आयोग ने बताया कि पहली बार असम, केरल और पुडुचेरी के सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई। कुल 296 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ। इन क्षेत्रों में 5.31 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत थे। मतदान के लिए 63,084 मतदान केंद्र बनाए गए और 2.5 लाख से अधिक मतदान कर्मियों की तैनाती की गई। सूत्रों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों में सर्वाधिक मतदान प्रतिशत यह दर्शाता है कि मतदाताओं का निर्वाचन आयोग पर गहरा विश्वास है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची की तैयारी और चुनाव संचालन में पारदर्शिता ने भरोसा बढ़ाया है। इस उच्च विश्वास के कारण भारत का लोकतंत्र पहले से अधिक मजबूत और सशक्त हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना है कहा कि 2026 के असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व लोकतंत्र के लिए भी ऐतिहासिक उदाहरण हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग की ओर से सभी मतदाताओं को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि लोकतांत्रिक जागरूकता, सहभागिता और विश्वास की सशक्त अभिव्यक्ति है। साथ ही “चुनाव का पर्व, मतदाता का गर्व” का संदेश दोहराया। उल्लेखनीय है कि इन चुनावों में मतदाता सुविधा बढ़ाने के लिए कई नई पहलें की गईं। इनमें ईवीएम बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के रंगीन फोटो, मोबाइल डिपॉजिट सुविधा, नए डिजाइन की मतदाता सूचना पर्चियां और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सहायता व्यवस्था शामिल रही।
