युवा उद्यमी कैरव गांधी अपहरण कांड का खुलासा, मास्टरमाइंड पंजाब का तेजिंदर पाल सिंह गिरफ्तार

Crime

Eksandeshlive Desk

पूर्वी सिंहभूम : जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के सीएच एरिया निवासी युवा उद्यमी कैरव गांधी के चर्चित अपहरण कांड में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले और सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले का मास्टरमाइंड पंजाब के लुधियाना निवासी तेजिंदर पाल सिंह उर्फ “सरदार जी” को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि अपहरण के बाद फिरौती की रकम वसूली गई थी या नहीं। जांच के दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में तीन अपहरणकर्ता घायल हुए थे। इलाज के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। 13 जनवरी को कैरव गांधी का अपहरण सीएच एरिया से उस समय कर लिया गया था, जब अपराधियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें जबरन वाहन में बैठा लिया। घटना के बाद जिले में सनसनी फैल गई थी। पुलिस की सघन दबिश के चलते 26 जनवरी की रात अपहृत उद्यमी को हजारीबाग जिले के चौपारण–बरही सीमा के पास छोड़ दिया गया था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पीयूष पांडेय के अनुसार, मामले का खुलासा अपहरण कांड में गिरफ्तार और मुठभेड़ में घायल आरोपित मोहम्मद इमरान उर्फ आमिर से पूछताछ के बाद हुआ। नालंदा जिले के इस्लामपुर थाना क्षेत्र निवासी इमरान ने बताया कि पूरी साजिश जमशेदपुर के मानगो इलाके में रची गई थी और इस गिरोह में कुल 12 लोग शामिल थे। अपहरण की योजना तेजिंदर पाल सिंह के निर्देश पर तैयार की गई थी। इमरान ने पुलिस को बताया कि अपहरण में इस्तेमाल वाहन खरीदने के लिए तेजिंदर ने चार लाख रुपये मुहैया कराए थे। वारदात के बाद तेजिंदर और उसका सहयोगी साद आलम इंडोनेशिया फरार हो गए थे, जहां से वे अपहृत के परिजनों से फिरौती को लेकर संपर्क में थे। साद आलम के माध्यम से ही इमरान की पहचान तेजिंदर से हुई थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि अपहरण से पहले अपराधियों ने कई महीनों तक जमशेदपुर में किराए के मकान तलाशे, पुलिस गतिविधियों की रेकी की और पूरी रणनीति बनाई। हथियार, कारतूस और एक पुरानी स्कॉर्पियो वाहन की व्यवस्था भी पहले से कर ली गई थी। स्कॉर्पियो को ओएलएक्स के जरिए पटना से खरीदा गया था। पुलिस अब तक इस मामले में गुड्डू सिंह, उपेंद्र सिंह, मोहम्मद इमरान, मोहन कुमार और अर्जुन सिंह सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अधिकांश आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अन्य की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही यह भी साफ कर दिया जाएगा कि फिरौती की रकम का लेन-देन हुआ या नहीं। प्रारंभिक जांच में यह मामला एक संगठित अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है।

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