जैन श्रद्धालुओं से मद्य, मांस, मधु और पंच उदम्बर फल का कराया गया परित्याग

Religious

Eksandeshlive Desk

रामगढ़ : आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी गुरुदेव के शिष्य मुनिश्री 108 प्रज्ञान सागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 प्रसिद्ध सागर जी मुनिराज का बुधवार की शाम प्रवास रामगढ़ में हुआ। गुरुवार को मुनि संघ के सानिध्य में अष्ट मूलगुण समारोह का भव्य आयोजन सकल दिगंबर जैन समाज के जरिये किया गया। इसके तहत मुनि संघ के जरिये श्रद्धालुओं को जैन धर्म की प्रथम श्रेणी मद्य, मांस, मधु एवं पंच उदम्बर फल का परित्याग कराया गया।

मौके पर मुनिश्री ने कहा कि जैन श्रद्धालु को अपने धर्म पालन की प्रथम श्रेणी का त्याग अवश्य कर अपने सच्चे जैनत्व का प्रथम उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। इस दौरान समारोह में 50 से अधिक श्रद्धालु ने मुनिश्री के सानिध्य में अष्ट मूलगुण को अपनाने की शपथ ली। वही, त्याग करने वाले श्रद्धालुओं को मुनिश्री का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। प्रातः काल मुनिश्री के मुखारविंद से शांति धारा कराई गई, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित थे। समाज के सचिव योगेश सेठी ने मुनिश्री से कुछ दिनों का प्रवास रामगढ़ में करने का आग्रह किया है, ताकि उनके सानिध्य में और भी धार्मिक कार्यक्रम संपादित करवा जा सके।

मुनिश्री के कार्यक्रमों में समाज के अध्यक्ष राजेंद्र चुड़ीवाल, राजू पाटनी, संजय सेठी, देवेंद्र गंगवाल, राजेश चुड़ीवाल, सुभाष सेठी, राकेश पांडेय, सुशील चूड़ीवाल, रेणु चुडी़वाल, ममता गंगवाल, पुष्पा अजमेरा, अरुणा जैन, सुनीता सेठी, प्रेमलता काला, श्रीकांता गंगवाल, प्रिया पाटनी, खुशबू चुड़ीवाल, उषा अजमेरा, मीडिया प्रभारी श्रवण जैन, गुड्डू जैन आदि शामिल थे।

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