आयुष्मान योजना की राशि नहीं मिलने से प्राइवेट अस्पताल परेशान, बैंक लोन लेकर कर रहे इलाज

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Eksandesh Desk

हजारीबाग: हजारीबाग और रामगढ़ के प्राइवेट अस्पतालों के संचालक और डॉक्टर कैमरे के सामने आए और खुले तौर पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष से आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए इलाज की राशि लंबित है तथा ऐसी स्थिति में प्राइवेट अस्पताल कैसे अपना गुजर-बसर करेंगे। डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन मरीजों की सेवा के लिए बैंक से लोन लेकर इलाज कर रहे हैं, पर अब स्थिति संकटपूर्ण होती जा रही है। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (भारत) की हजारीबाग शाखा द्वारा बुधवार को एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें हजारीबाग और रामगढ़ के कई प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर और संचालक मुख्य रूप से उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड शाखा के जॉइंट सेक्रेटरी हर्ष अजमेरा ने कहा की पिछले एक साल से प्राइवेट अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत राशि नहीं मिली है जो करोड़ों में है और इस परिस्थिति में अस्पताल कैसे कार्य करेगा। हम गरीबों का समर्पणपूर्वक इलाज करते हैं, उन्हें स्वस्थ कर घर भेजते हैं पर अस्पताल पर जो आर्थिक दबाव आता है उसे केवल अस्पताल ही समझ सकता है। आयुष्मान योजना बस एक नाम बनकर रह गया है तथा इसकी प्रक्रियाएँ इतनी जटिल हैं कि अस्पताल परेशान हो जाता है फिर भी सेवा भावना से हम अपने कर्तव्यों पर अडिग रहते हैं परंतु अब एक वर्ष से भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा की अपने कर्मचारियों के वेतन, दवाइयों की आपूर्ति और अन्य जरूरी सामग्री की खरीद बैंक से लोन लेकर करनी पड़ रही है। आंकड़ों की बात करें तो हजारीबाग में 30 से 40 करोड़ रुपये और रामगढ़ में लगभग 10 करोड़ रुपये आयुष्मान योजना के तहत बकाया हैं। यह तो केवल एक अनुमानित आँकड़ा है। झारखंड में 2018 से आयुष्मान योजना शुरू हुई, शुरुआत में इसका संचालन बेहतर था, पर पिछले एक वर्ष में यह कछुए की चाल चल रही है। अगर यह स्थिति नहीं सुधरी, तो अस्पताल वेंटिलेटर पर पहुँच जाएगा और यदि यही सिलसिला कुछ और दिन चलता रहा तो प्राइवेट अस्पतालों को मजबूरी में बंद करना पड़ेगा। हर्ष अजमेरा ने यह भी जानकारी दी कि आरोग्यम हॉस्पिटल ने अब तक 25240 मरीजों का आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज किया है, जिसमें 3500 मरीजों का भुगतान अब भी बकाया है। यह तो बस एक अस्पताल का आंकड़ा है हजारीबाग के कई अन्य अस्पतालों की भी यही स्थिति है।

प्रेस वार्ता में डॉ. मिराज ने अपनी बातों को रखते हुए बताया कि आयुष्मान योजना का भुगतान तो रुका ही है, साथ ही सरकार अस्पतालों को चलाने के लिए उपकरणों पर भारी टैक्स भी लगा रही है। बायोमेडिकल वेस्ट के लिए हर बेड पर 7 रुपए प्रति दिन देना पड़ता है। यदि अस्पताल के पास 100 बेड का लाइसेंस है, तो प्रतिदिन 700 देना होगा। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर भुगतान नहीं मिल रहा और दूसरी ओर पैसों का बोझ बढ़ रहा है। वहीं डॉ. अमर ने कहा कि आयुष्मान योजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के लिए एक वरदान है। हम इसे वरदान मानकर ही समाज सेवा करते हैं, पर सरकार जब भुगतान ही बंद कर दे तो अस्पताल का स्टाफ और उनके परिवार कैसे चलेंगे। हम जिन संसाधनों का उपयोग करते हैं, उनका भुगतान कैसे होगा? जब कोई मरीज आयुष्मान कार्ड लेकर आता है, तो सबसे पहले बायोमेट्रिक प्रक्रिया होती है, जिसमें नाम और आधार का मिलान किया जाता है इसके बाद अप्रूवल की प्रक्रिया शुरू होती है और हर मिनट का रिकॉर्ड अपलोड किया जाता है। मरीज को औसतन तीन दिन अस्पताल में रखा जाता है, फिर उन्हें रिलीज किया जाता है। उसके बाद अस्पताल की प्रतिक्रिया भेजी जाती है और नियम के अनुसार 15 दिनों में भुगतान होना चाहिए, परंतु अब यह नहीं हो रहा। उन्होंने अंत में यह भी कहा कि हम किसी मरीज को मना नहीं कर सकते कि हम इलाज नहीं करेंगे यह हजारीबाग है, यहां कभी भी कोई हमारे ऊपर आरोप लगा सकता है। ऐसे में हम लगातार सेवा दे रहे हैं, पर सरकार से विनम्र आग्रह है कि जल्द से जल्द बकाया भुगतान किया जाए, ताकि हम अपने कार्य को निर्बाध रूप से आगे बढ़ा सकें। क्षितिज हॉस्पिटल के निदेशक अंजनी कुमार ने बताया कि हजारीबाग में अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं उनके लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाना असंभव सा है । सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान योजना से ऐसे गरीब लोगों को लाभ पहुंचता रहा है ।एक वर्ष से आयुष्मान का भुगतान नहीं मिलने के कारण हम जैसे निजी अस्पतालों से संचालन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । वहीं मरीजों की दशा को देखते हुए कहीं न कहीं सेवा जारी है । अगर सरकार इस पर सकारात्मक पहल करती है तो काफी अच्छा होगा और हम अपनी सेवाएं निर्बाध रूप से ऐसे गरीब लोगों को देते रहेंगे । मौके पर हजारीबाग प्राइवेट हॉस्पिटल के कई डॉक्टर एवं अस्पताल के प्रशासक वहीं रामगढ़ प्राइवेट हॉस्पिटल के संचालक मौजूद रहे जिसमें जीवन श्री हॉस्पिटल रामगढ़,प्राइम हॉस्पिटल रामगढ़, द होप हॉस्पिटल रामगढ़, आरोग्यम हॉस्पिटल, डॉक्टर विनस आई एंड डेंटल हॉस्पिटल,न्यू लाइफ लाइन, क्षितिज हॉस्पिटल, श्रीनिवास हॉस्पिटल,मां अंबे नर्सिंग होम, वंदना नर्सिंग होम, आयुष्मान हॉस्पिटल, क्षितिज हॉस्पिटल, न्यू लाइफलाइन हॉस्पिटल, राज हॉस्पिटल,महावीर हॉस्पिटल, श्री हरि कृष्ण नर्सिंग होम एवं कई अस्पताल के संचालक मौजूद रहें ।